खरसावां: शनिवार को कुड़मी समाज ने अधिकार और पहचान की लड़ाई को लेकर काला दिवस मनाया. यह कार्यक्रम खरसावां स्थित अर्जुना स्टेडियम में आयोजित हुआ, जिसमें कुड़मालि छात्र- छात्राएं और शिक्षक काले रिबन लगाकर शामिल हुए.

मौके पर शिक्षक गुणधाम मुतरुआर ने कहा कि 6 सितंबर का दिन कुड़मि समाज के लिए गहरे दर्द और ऐतिहासिक अन्याय की स्मृति है, क्योंकि वर्ष 1950 में भारत सरकार ने कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटा दिया था. वहीं शिक्षक सुनील कुमार जुरुआर ने बताया कि ब्रिटिश शासनकाल में 1931 से 1950 तक कुड़मी समाज एसटी सूची में था, लेकिन आज़ादी के बाद बिना किसी अधिसूचना के इसे सूची से बाहर कर दिया गया.
वोकेशनल शिक्षक प्रभात कुमार महतो ने कहा कि इस निर्णय ने समाज को संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर दिया और पहचान के संकट में डाल दिया. वर्षों से कुड़मी समाज आंदोलन, रेल टेका, धरना और काला दिवस जैसे आयोजनों के माध्यम से अपने अधिकारों की बहाली के लिए संघर्षरत है.
समाज ने सरकार से मांग की है कि कुड़मी जाति को पुनः अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाए. इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र- छात्राओं और ग्रामीणों ने भाग लिया और सरकार को एकजुटता का संदेश दिया.

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