चांडिल/ Afroj Mallick

सरायकेला- खरसावां जिले का कपाली क्षेत्र भले ही अब नगर परिषद घोषित हो चुका है, लेकिन यहां के नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. हालत यह है कि कई मोहल्लों में बिजली के खंभों के अभाव में लोग बांस- बल्लियों का सहारा लेकर अपने घरों तक बिजली पहुंचा रहे हैं. यह नजारा किसी दूर- दराज के गांव का नहीं, बल्कि कपाली नगर परिषद क्षेत्र के अंदर का है. जहां 21वीं सदी में लोग जान जोखिम में डालकर बिजली का उपयोग कर रहे हैं.
कई जगहों पर बिजली के तार घने पेड़ों की डालियों से लिपटे हुए हैं. थोड़ी सी भी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है. बारिश के मौसम में खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है. स्थानीय शरद चंद्र दास का कहना है कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग और नगर प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है कार्रवाई नहीं.
उन्होंने बताया करंट लगने से कई पशुओं की जान भी जा चुकी हैं. वहीं कुछ क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर की स्थिति जर्जर है और लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है. अब सवाल उठता है इसका जिम्मेदार कौन है ? क्या नगर परिषद बनने के बाद भी विकास योजनाएं सिर्फ कागज़ों पर रह गई हैं ? क्या बिजली विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है ? क्या जनप्रतिनिधियों ने चुनाव जीतने के बाद इस क्षेत्र की सुध लेना छोड़ दिया ? स्थानीय प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से आग्रह है कि कपाली की जमीनी हकीकत पर ध्यान दें और तत्काल बिजली खंभों की व्यवस्था कर बांस- बल्लियों और पेड़ों के सहारे चल रही बिजली लाइनों को हटाया जाए, ताकि नागरिकों की जान- माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

