चांडिल/ Afroj Mallick

सरायकेला- खरसावां जिला के कपाली क्षेत्र में इन दिनों दर्जनों मासूम बच्चे शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान से कोसों दूर भटकते नजर आ रहे हैं. कोई रिक्शा चला रहा है, कोई कचरा चुन रहा है, तो कोई गलियों में कबाड़ बीनने को मजबूर है. पूछे जाने पर अधिकतर बच्चों का एक ही जवाब होता है – पिताजी नहीं हैं, मां बीमार है और फिर वे चुपचाप वहां से निकल जाते हैं.
इन मासूमों की ये स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है. जहां सरकार की योजनाएं – मुफ्त शिक्षा, बाल कल्याण, मिड डे मील और बाल श्रम निषेध कानून – सिर्फ कागजों तक सिमटी नजर आती हैं, वहीं समाज और प्रशासन की चुप्पी इस समस्या को और भयावह बना रही है. कपाली जैसे शहरी क्षेत्र में अगर बच्चों का भविष्य सड़कों पर भटक रहा है तो यह सिर्फ पारिवारिक संकट नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक विफलता भी है. इस मुद्दे पर आज़ाद समाज पार्टी के सरायकेला-खरसावां जिला अध्यक्ष मोहम्मद एजाज अहमद ने कहा कि प्रशासन को जल्द बाल सर्वे कराना चाहिए ताकि शिक्षा से वंचित और बाल श्रम में लगे बच्चों की वास्तविक संख्या सामने आ सके. उन्होंने सुझाव दिया कि बाल संरक्षण अधिकारी और सामाजिक संगठनों की मदद से इन बच्चों को स्कूल से जोड़ा जाए. साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और जन- जागरूकता अभियान चलाना चाहिए, ताकि कोई दुकानदार, कबाड़ी या व्यक्ति इन नाबालिग बच्चों से दिहाड़ी मजदूरी न करवाए. अंत में उन्होंने कहा, यह समय है मौन तोड़ने का, जिम्मेदारी निभाने का और भविष्य बचाने का. अगर आज हमने इन बच्चों को नहीं संभाला, तो आने वाला कल हम सभी से जवाब मांगेगा.

