कांड्रा/ Bipin Varshney स्थित मुख्य मुक्तिधाम बनाडूंगरी में व्याप्त गंभीर जल संकट ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. हालात ऐसे हो गए हैं कि अंतिम संस्कार जैसी पवित्र और आवश्यक प्रक्रिया भी पानी के अभाव में कठिन हो रही है. इस समस्या को लेकर ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का गुस्सा अब प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ खुलकर सामने आने लगा है.

ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर इंसान को अंतिम विदाई दी जाती है, वहां पानी जैसी बुनियादी व्यवस्था का न होना शासन और प्रशासन के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है. गर्मी के मौसम में मुक्तिधाम में एक बूंद पानी तक उपलब्ध नहीं रहता, जिससे शवदाह के दौरान परिजनों को भारी मानसिक और शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ती है.
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से क्षेत्र की जल समस्या को लेकर केवल आश्वासन ही दिए जाते रहे हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं किया गया.
जलाशयों के अभाव में हर साल गर्मी आते ही हैंडपंप, तालाब और कुएं सूख जाते हैं. सिंचाई के साधनों की कमी के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और गरीब किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं. स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि पूरे क्षेत्र में पशु-पक्षी, मवेशी और अन्य जीव- जंतु भीषण गर्मी में पानी की तलाश में भटकने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही से पर्यावरण और जैव विविधता पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को दिए गए आवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही बना डूंगरी मुक्तिधाम में नए जलाशय या डैम के निर्माण की स्वीकृति नहीं दी गई और संबंधित विभाग द्वारा स्थल का सर्वे शुरू नहीं हुआ, तो वे जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी. ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तो कांड्रा जैसे क्षेत्रों में आज भी लोग पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए क्यों तरस रहे हैं. क्या सरकार किसी बड़े आंदोलन या अनहोनी का इंतजार कर रही है. अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग इस गंभीर जनहित और मानवीय संकट पर कब तक चुप रहते हैं या समय रहते ठोस कदम उठाकर ग्रामीणों को राहत प्रदान करते हैं.

