कांड्रा/ Bipin Varshney मोड़ स्थित सिदो- कान्हू उद्यान में हूल दिवस के मौके पर सोमवार को झामुमो के केन्द्रीय सदस्य कृष्णा बास्के ने अपने साथियों के साथ सिदो- कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए शहीदों को नमन किया.

इनके अलावा होनी सिंह मुंडा, गौतम महतो, राजेश भगत, इंद्रो मुर्मू एवं ग्रामीणों ने भी सिदो- कान्हू की प्रतिमा पर माल्यर्पण किया. कृष्णा बास्के ने सिदो- कान्हू को नमन करते हुए कहा कि आजादी एवं हक के लिए झारखंड के अनेक महापुरुषों ने अंग्रजों के साथ लड़ाई करते हुए सीने पर गोलियां खाई और शहीद हुए हैं. इनमें से सिदो- कान्हू ने भी 1855 में अपने हक व आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और तीर- धनुष लेकर तोप व बंदूकों का मुकाबला किया. इसी लड़ाई में सिदो-कान्हू शहीद हुए परंतु उनका नाम अमर है. वे इन शहीदों को शत- शत नमन करते हैं.
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कृष्णा बास्के ने युवाओं को सिदो-कान्हू के आदर्श का अनुसरण करते हुए अपनी उर्जा को सकारात्मक कार्य में लगाने का आहवान किया. उन्होने कहा 30 जून को संताल हूल दिवस है. यह हूल, जिसका केंद्र झारखंड का संताल परगना था, 1855- 56 में वीर सिदो- कान्हू के नेतृत्व में हुआ था. जल, जंगल जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए संताल जनजाति के प्रतिरोध की यह सबसे बड़ी घटना थी, किंतु ब्रिटिश हुकूमत और महाजनी- जमींदारी शोषण के खिलाफ संतालों का यह अकेला विद्रोह नहीं था. उन्होंने जिलेवासियो से अपील करते हुए कहा कि सुंदरता का जो चिराग सिदो- कान्हू जी के नेतृत्व मे 167 साल पूर्व इस धरती पे जलाया गया था उसी से प्रेरणा लेते हुए अपने राज्य हित एवं देश हित मे आगे बढे.
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कृष्णा बास्के ने विषेशकर युवाओं से अपील करते हुए कहा कि जिस समर्पण भाव के साथ झारखण्ड के पूर्वजो जैसे सिदो- कान्हू, फूलो- झानो, बिरसा मुंडा, तिलका मांझी समेत तमाम शाहिदों ने अपने क्षेत्र, अपने राज्य एवं देश के विकास के लिए संघर्ष किया, जिस भावना के साथ कार्य किया उसी भाव से आप भी अपने क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करें. कार्य चाहे छोटा ही क्यों ना हो पर प्रारम्भ करें. जिस भी क्षेत्र मे गलत कार्य हो रहा है उसके विरोध मे आवाज़ उठाना, सही रास्ते पर चलने हेतु लोगो को प्रेरित करना या अपने स्तर से जितना भी जो भी संभव है आप अपने गाँव, अपने क्षेत्र, अपने राज्य एवं देश के विकास मे सहयोग प्रदान करें.
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कृष्णा बास्के (झामुमो नेता)

