कांड्रा/ Bipin Varshney लोकआस्था के महापर्व छठ की तैयारियां कांड्रा में जोरों पर हैं, लेकिन इस बार भी जिला प्रशासन की उदासीनता साफ़ झलक रही है. कांड्रा क्षेत्र के दो प्रमुख घाट स्वर्णरेखा नदी घाट और हरीश चंद्र घाट (बांधा झुरिया) पर जिला प्रशासन द्वारा कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई है.

घाटों की सफाई और सजावट की जिम्मेदारी समाजसेवियों तथा स्थानीय युवाओं ने अपने हाथों में ले ली है. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता योगेन्द्र महतो ने बताया कि “हर साल की तरह इस बार भी जिला प्रशासन की ओर से न तो सफाई की व्यवस्था की गई है, न ही रोशनी या सुरक्षा के इंतजाम. श्रद्धालु खुद मेहनत कर घाटों को स्वच्छ बना रहे हैं.”
पहले कांड्रा के विभिन्न तालाबों में छठ पर्व मनाया जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से जिला प्रशासन की अनदेखी और गंदगी के कारण तालाब पूजा के लायक नहीं बचे हैं. अब श्रद्धालु मजबूर होकर नदी और झुरिया घाट की ओर रुख कर रहे हैं.
श्रद्धालु रीना देवी ने कहा, “छठ हमारे लिए भावनाओं का पर्व है. अगर जिला प्रशासन सहयोग नहीं करेगा, तो हम खुद सफाई कर के घाट सजाएँगे, क्योंकि आस्था से बड़ा कुछ नहीं.”
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि छठ पर्व के अवसर पर घाटों पर सफाई, रोशनी, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो.
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