आदित्यपुर: झारखंड में निकाय चुनाव की बिगुल कभी भी फूंकी जा सकती है. निर्वाचन आयोग की तैयारियां लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और संभावित प्रत्याशी अपने- अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं. इस बार सबसे रोचक और कड़ा मुकाबला आदित्यपुर नगर निगम में देखने को मिलने वाला है, जहां मेयर सीट को अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है.
राज्य सरकार के इस फैसले से मेयर बनने की उम्मीद लगाए कई नेताओं को बड़ा झटका लगा है. अब ये नेता अपनी रणनीति बदलते हुए डिप्टी मेयर की कुर्सी पर नजरें गड़ाए हुए हैं. हालांकि डिप्टी मेयर बनने के लिए भी पहले पार्षद का चुनाव जीतना अनिवार्य होगा, जो किसी के लिए आसान नहीं रहने वाला है.

वहीं दूसरी ओर इस आरक्षण से कई आदिवासी नेताओं के लिए मौके के दरवाजे खुल गए हैं. इस रेस में कई बड़े और चर्चित नाम सामने आने लगे हैं. इनमें सबसे प्रमुख नाम बास्को बेसरा का बताया जा रहा है. इसके अलावा बरजो राम हांसदा, केपी सोरेन, लालबाबू सरदार, प्रभासिनी कालुंडिया, विनोती हांसदा, डब्बा सोरेन और शकुंतला महाली जैसे नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं. हालांकि फिलहाल किसी ने खुलकर दावेदारी नहीं की है, लेकिन मुकाबला बेहद रोचक होने के संकेत साफ हैं.
इस चुनावी समीकरण से सबसे ज्यादा झटका निवर्तमान मेयर विनोद कुमार श्रीवास्तव, डिप्टी मेयर बॉबी सिंह और आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह को लगा है. ये सभी मेयर बनने का सपना संजोए हुए थे, लेकिन अब डिप्टी मेयर पद के लिए संघर्ष करते नजर आएंगे. इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता को अपने पिछले कार्यकाल का हिसाब देना होगा. पिछले करीब 15 वर्षों से ये नेतागण किसी न किसी रूप में नगर निगम का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, बावजूद इसके आज भी शहर की जनता शुद्ध पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज-ड्रेनेज, साफ- सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रही है.
विगत आठ वर्षों से आदित्यपुर शहरी जलापूर्ति योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है. सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम की योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं. नाली, गली और सड़कों की हालत भी बदहाल बनी हुई है.
पार्षद चुनाव को लेकर भी माहौल दिलचस्प है. एक सर्वे के अनुसार 35 वार्डों में से केवल 8 से 10 वार्ड पार्षदों को छोड़कर लगभग सभी निवर्तमान पार्षदों के प्रति जनता में नाराजगी देखने को मिल रही है. सर्वे रिपोर्ट बताती है कि इस बार मतदाता गुस्से में हैं और नए चेहरों पर भरोसा जताने का मन बना चुके हैं. इसके अलावा वार्ड आरक्षण रोस्टर के चलते भी कई निवर्तमान पार्षदों को झटका लगा है. चूंकि डिप्टी मेयर का चुनाव पार्षदों में से ही होना है, इसलिए पार्षद चुनाव भी बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है.
कुल मिलाकर आदित्यपुर नगर निगम का यह चुनाव कड़ा और दिलचस्प रहने के पूरे आसार हैं. अब सभी की निगाहें निर्वाचन आयोग की औपचारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं.

