जामताड़ा/ Manish Baranwal जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. इलाज और आवश्यक संसाधनों के अभाव में तीन वर्षीय मासूम की मौत के बाद शहर में भारी आक्रोश देखा गया. इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जानकारी के अनुसार जामताड़ा बाजार निवासी संटू साव के तीन वर्षीय पुत्र अंशु को अचानक पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई. परिजन उसे तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे. आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर वहां कोई शिशु रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं था और बच्चे को देने के लिए ऑक्सीजन की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी.
परिजनों के मुताबिक काफी देर तक अस्पताल में अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही. बाद में अस्पताल प्रबंधन ने अपनी असमर्थता जताते हुए बच्चे को बेहतर इलाज के लिए बाहर किसी बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी. परिजन जब उसे बेहतर इलाज के लिए आसनसोल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी रास्ते में मासूम ने दम तोड़ दिया.
घटना के विरोध में शुक्रवार को शहर के लोग समाहरणालय पहुंचे और उपायुक्त को मांग पत्र सौंपते हुए सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अस्पताल में बच्चों के डॉक्टर, आईसीयू और पर्याप्त ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.
समाहरणालय के बाद प्रदर्शनकारी और मृतक के परिजन जामताड़ा के इंदिरा चौक पहुंचे, जहां उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का पुतला दहन किया और उनके खिलाफ नारेबाजी की. मौके पर मौजूद मिथिलेश गुप्ता, जयप्रकाश यादव, जीतू सिंह, सचिन साव, शक्ति साहू, प्रिंस साव, कंचन साव, मोनू साव और आकाश सहित अन्य लोगों ने कहा कि जामताड़ा स्वास्थ्य मंत्री का गृह जिला होने के बावजूद यहां की चिकित्सा व्यवस्था बेहद खराब है और अस्पताल केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं.
वहीं सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. दिनेश प्रसाद ने बताया कि सदर अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था नहीं है. बच्चे को बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर किया गया था और बच्चे की मौत सदर अस्पताल में नहीं हुई है. यह घटना एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है.

