गम्हरिया/ Bipin Varshney राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और सरायकेला विधानसभा के विधायक चंपई सोरेन शनिवार को पूरे लय में नजर आए. जहां विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर उन्होंने इशारों ही इशारों में सरकार पर एक के बाद एक बड़े हमले किए. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है चंपाई सोरेन ने किसी आंदोलन को नहीं बेचा बल्कि उसे अंजाम तक पहुंचा कर दम लिया.

चाहे टाटा स्टील का मामला हो या जादुगोड़ा माइंस का. हर आंदोलन को उन्होंने अंजाम तक पहुंचाया और गरीब आदिवासी मूलवासियों को उनका हक दिलाया. टाटा स्टील करोड़ों रूपये लेकर उनके आगे नतमस्तक था मगर मैंने अपनी क़ीमत नहीं लगाई. टाटा स्टील उनकी हत्या तक करना चाहती थी मगर मैं डिगा नहीं. आज मैंने झारखंड को घुसपैठियों और धर्मांतरण करने वाले संस्थाओं से मुक्त करने का बीड़ा उठाया है और राज्य के आदिवासियों मूलवासियों को इससे मुक्त करा कर ही दम लूंगा चाहे इसकी मुझे कितनी भी कीमत चुकानी पड़े. राज्य में रूढ़िवाड़ी प्रथा लागू हो, मानकी- मुंडा को उनका हक- अधिकार मिले इसके लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा.

