जामताड़ा/ Manish Baranwal राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा देशव्यापी सप्तशक्ति संगम का आयोजन किया गया. यह संगम मातृशक्ति के भीतर निहित सात शक्तियों के विकास और संवर्धन हेतु आयोजित किया गया था. कार्यक्रम सरस्वती शिशु मंदिर, नामूपाडा, जामताड़ा में आयोजित किया गया.

मुख्य अतिथि जिला संयोजिका आभा आर्या, फतेहपुर की आचार्य भादू कुमारी पंडित और विद्यासागर की आचार्य ललिता देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर संगम का शुभारंभ किया. अतिथियों का स्वागत शॉल और तुलसी पौधा देकर किया गया.
जिला संयोजिका आभा आर्या ने कहा कि स्त्रियां पूरे राष्ट्र की सृजनकर्ता हैं और इसलिए सर्वोपरि हैं. उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के बिना संपूर्ण राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती. पर्यावरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और वायु प्रदूषण के संकट से विश्व गुजर रहा है और इसे बचाने का सबसे प्रभावी तरीका वृक्षारोपण है. उन्होंने कुटुंब प्रबोधन पर जोर देते हुए कहा कि एकल परिवार बढ़ने से बच्चे अपने दादा- दादी, नाना- नानी और अन्य रिश्तेदारों से दूर हो रहे हैं, इसलिए संयुक्त परिवार की परंपरा आवश्यक है.
विद्यासागर विद्या मंदिर की दीदी ललिता देवी ने संगम के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए बताया कि नारियों में निहित सप्त शक्तियों—कीर्ति, श्री, वाणी, स्मृति, मेघा, धृति और क्षमा- के संवर्धन का प्रयास इस कार्यक्रम के माध्यम से किया जा रहा है. फतेहपुर विद्या मंदिर की दीदी भादू कुमारी ने कहा कि महिलाएं परिवार के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं. अध्यक्षीय भाषण में अभिभाविका आशा कुमारी ने कहा कि निर्माण और विनाश अपने हाथों में हैं और माता-पिता बच्चों में अच्छे संस्कार डालकर उन्हें कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बना सकते हैं. कार्यक्रम में सैकड़ों माताएं उपस्थित थीं. मंच का संचालन अनुपमा कमल ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रेरणा कुमारी ने प्रस्तुत किया. साक्षी कुमारी ने सप्तशक्ति का संकल्प कराया. कार्यक्रम के दौरान देश की संस्कृति पर आधारित प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई. विदाई के समय खोईछा भराई की गई. दीपिका कुमारी और शीफा परवीन, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के रूप में, कार्यक्रम में भागी. कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के सभी आचार्य, प्रधानाचार्य, समिति सचिव, उपाध्यक्ष और विभाग निरीक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

