जामताड़ा/ Manish Baranwal इस्लाम धर्म का पवित्र महीना माह-ए-रमजान पहले रोजे के साथ शुरू हो गया. बरकत, रहमत और मगफिरत के इस महीने का मुस्लिम समुदाय को पूरे साल इंतजार रहता है. पहले रोजे पर शहर की मस्जिदों में खास रौनक देखने को मिली.

रोजेदारों ने सुबह सेहरी कर रोजे की शुरुआत की और दिनभर सब्र व इबादत में समय बिताया. शाम होते ही मस्जिदों और घरों में इफ्तार की तैयारियां शुरू हो गईं. अजान के साथ खजूर और पानी से रोजा खोला गया. कई जगहों पर सामूहिक इफ्तार का आयोजन हुआ, जहां आपसी भाईचारे की मिसाल देखने को मिली.
पाकडीह व सरखेलडीह जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अख्तर रज़ा ने बताया कि रमजान आत्मशुद्धि और आत्मसंयम का महीना है. उन्होंने कहा कि रमजान के 30 दिनों को तीन अशरों में बांटा गया है. पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नुम की आग से निजात का होता है.
उन्होंने नमाज, कुरआन की तिलावत और नेक कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की. साथ ही जकात और फितरा के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद करने पर जोर दिया.
रमजान की शुरुआत के साथ बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है. खजूर, शर्बत, फल और इफ्तार की सामग्रियों की दुकानों पर भीड़ देखी गई. यशवंतपुर के दुकानदार मो. कलीम ने बताया कि खजूर की मांग सबसे अधिक है और लोग अलग- अलग किस्में खरीद रहे हैं.
इस बार मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और सुहावना रहने से रोजेदारों को सहूलियत महसूस हो रही है. मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो चुकी है और देर रात तक इबादत का सिलसिला जारी है.

