जामताड़ा/Manish Barnwal मां चंचला त्रिदिवसीय त्रयोदस वार्षिक महोत्सव 2026 को ऐतिहासिक, भव्य और दिव्य स्वरूप देने के उद्देश्य से 16 जनवरी को प्रस्तावित मां चंचला कलश शोभा यात्रा के तहत कलश साज-सज्जा को लेकर स्वयंसेवकों और महोत्सव समिति के पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में आयोजन की रूपरेखा, व्यवस्थाओं और अनुशासन पर विस्तार से मंथन किया गया.

बैठक में जानकारी दी गई कि इस वर्ष 40 हजार से अधिक कलशों की साज-सज्जा की जाएगी. सभी कलशों को मां चंचला मंदिर परिसर में एकत्रित किया जाएगा, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ विशेष पूजा-अर्चना के उपरांत प्रत्येक कलश में पवित्र जल भरा जाएगा. इसके बाद आम पत्र, पुष्प, नारियल और पारंपरिक धार्मिक सामग्री से कलशों को सजाकर शोभा यात्रा के लिए तैयार किया जाएगा.
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ मार्गदर्शकों और अनुभवी सदस्यों ने आयोजन को अनुशासित, सुव्यवस्थित और श्रद्धा भाव के साथ संपन्न कराने को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए.
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महोत्सव समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल ने कहा कि मां चंचला का यह महोत्सव किसी एक व्यक्ति या समिति का नहीं, बल्कि पूरे जामताड़ा वासियों और देश-विदेश में बसे माता के भक्तों की आस्था का प्रतीक है. मां की कृपा से यह आयोजन हर वर्ष और अधिक भव्य रूप लेता जा रहा है.
उन्होंने कहा कि 40 हजार से अधिक कलशों की साज-सज्जा अपने आप में एक ऐतिहासिक कार्य है, जो तभी संभव है जब सभी स्वयंसेवक इसे सेवा और साधना मानकर करें. मां के कार्य में शुद्धता और पवित्रता सबसे आवश्यक है. उन्होंने विश्वास जताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सभी स्वयंसेवक अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन करेंगे.
वीरेंद्र मंडल ने कलश साज-सज्जा से जुड़े सभी स्वयंसेवकों से महोत्सव अवधि के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाने, लहसुन-प्याज सहित तामसिक भोजन का त्याग करने और पूर्ण अनुशासन व श्रद्धा के साथ सेवा कार्य में जुटने का विशेष आग्रह किया. उन्होंने यह भी कहा कि मां चंचला की कृपा से 16 जनवरी को निकलने वाली कलश शोभा यात्रा राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक पहचान बनाएगी.
बैठक में प्रमुख रूप से महान अधिवक्ता सह समिति के वरिष्ठ सदस्य मोहन लाल वर्मन, लक्ष्मण झा, त्रिलोचन पांडे, वीरेंद्र बाबू, पारसनाथ दुबे, जोगेंद्र पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठजन और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे. सभी ने एक स्वर में मां चंचला त्रिदिवसीय त्रयोदस वार्षिक महोत्सव 2026 को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का संकल्प लिया.

