जामताड़ा/ Yogesh Kumar जिले में अवैध कारोबार इन दिनों अपने चरम पर है और माफियाओं ने खुले तौर पर अपना वर्चस्व कायम कर लिया है. हाल ही में ईडी द्वारा झारखंड और बंगाल के 40 ठिकानों पर अवैध कोयला व खनन नेटवर्क पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसके बाद जामताड़ा के बालू माफियाओं में खौफ जरूर देखा जा रहा है. हालांकि कई महीनों से जिले में बिना रोक-टोक अवैध बालू खनन चलता रहा है, जिसमें प्रशासन और माफियाओं की मिलीभगत के आरोप लगातार लगते रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ईडी की 40 जगहों पर हुई कार्रवाई में जामताड़ा भी शामिल होता तो जिले का पूरा हालात बदल सकता था. जामताड़ा की नदियों में दिन-रात भारी मशीनों से बालू निकासी होती रही है और रात के अंधेरे में सैकड़ों हाईवे ट्रकों से बिहार और बंगाल के लिए अवैध आपूर्ति की जा रही है.

जिले के कई जनप्रतिनिधियों ने अवैध खनन पर रोक लगाने और जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है. आरोप है कि प्रशासनिक संरक्षण के चलते कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है. पूर्व कृषि मंत्री श्री बाटुल ने भी कहा था कि “अधिकारी खुद अवैध गाड़ियों को पासिंग दे रहे हैं और पूरा जिला भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है.”

भाजपा जिला अध्यक्ष सुमित शरण ने बिंदा पत्थर थाना क्षेत्र में हो रहे अवैध कारोबार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि थाना अवैध खनन रोकने में विफल है तो थाना प्रभारी को इस्तीफा दे देना चाहिए. इसी क्रम में जे.एल.के.एम. जिला अध्यक्ष मंतोष कुमार ने उपायुक्त को ज्ञापन देकर जिले में अवैध बालू उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की और प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर प्रश्न उठाए.

सूत्रों के अनुसार टाउन थाना क्षेत्र के चलना, अमलाचतार, गोपालपुर, सत्साल सहित कई बालू घाटों पर माफियाओं का पूरा दबदबा है. वहीं नाला क्षेत्र के महेशमुंडा, पलस्थली और बिंदा पत्थर घाटों में अवैध खनन चरम पर है. नाला क्षेत्र बंगाल सीमा से सटा होने के कारण माफियाओं को और आसानी मिलती है — महेशमुंडा से महज 200 मीटर की दूरी पर बालू लदा वाहन बंगाल में प्रवेश कर जाता है, जिसके बाद पूरा नियंत्रण माफियाओं के हाथ में चला जाता है. यही कारण है कि जामताड़ा जिला बालू के अवैध कारोबार का बड़ा केंद्र बन चुका है.

लगातार शिकायतों और जनप्रतिनिधियों की आवाज के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. इससे साफ झलकता है कि संरक्षण का मजबूत तंत्र अवैध कारोबार को लगातार बढ़ावा दे रहा है.

जामताड़ा की आम जनता अब निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रही है, ताकि जिले की नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की खुलेआम हो रही लूट पर रोक लग सके.

