जामताड़ा/ Manish Baranwal साइबर अपराध के लिए कुख्यात जामताड़ा जिले में फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने वाले दो साइबर अपराधियों को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई है. जिला जज प्रथम अजय कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 5 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है.

यह मामला वर्ष 2019 का है. पुलिस के अनुसार 8 जनवरी 2019 को कर्माटांड़ के तत्कालीन थाना प्रभारी मंगल प्रसाद कुजूर ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की थी. इस दौरान कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के अलगचुआ निवासी सरफराज अंसारी और मन्नान अंसारी को गिरफ्तार किया गया था. इनके विरुद्ध साइबर थाना कांड संख्या 46/2019 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते थे और उन्हें झांसे में लेकर उनके मोबाइल पर आए OTP की जानकारी हासिल कर लेते थे. इसके बाद उनके बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे.
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों की जांच के बाद न्यायालय ने आरोपियों को भारतीय दंड विधान की धारा 419, 420 और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत दोषी पाया. कोर्ट ने धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत 5 वर्ष का कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माना, धारा 419 (पहचान बदलकर ठगी) के तहत 3 वर्ष का कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना तथा आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत 3 वर्ष का कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा. न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ- साथ चलेंगी, यानी दोषियों को अधिकतम 5 वर्ष जेल में बिताने होंगे. विचारण के दौरान जेल में बिताए गए समय को भी मुख्य सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा. इस फैसले को क्षेत्र में सक्रिय अन्य साइबर अपराधियों के लिए कड़ी चेतावनी माना जा रहा है. फिलहाल दोनों आरोपी जेल में अपनी सजा काट रहे हैं.

