जामताड़ा/ Yogesh Kumar डिजिटल इंडिया के दौर में जहां देश भर में ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं जामताड़ा जिले में स्थिति इसके उलट देखने को मिल रही है. जिले के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर डिजिटल भुगतान सुविधा लगभग बंद हो गई है. शहर के इंडियन ऑयल से लेकर भारत पेट्रोलियम तक, अब उपभोक्ताओं को पेट्रोल या डीजल भरवाने के लिए नकद राशि या एटीएम कार्ड का उपयोग करना पड़ रहा है.

जानकारी के अनुसार, साइबर अपराध के लिए कुख्यात जामताड़ा में लगभग छह माह पहले कुछ पेट्रोल पंप संचालक डिजिटल भुगतान से संबंधित ठगी की चपेट में आ गए थे. कई उपभोक्ताओं ने ऐसे बैंक खातों से यूपीआई या गूगल पे के माध्यम से भुगतान किया, जिनमें साइबर अपराध से अर्जित धनराशि ट्रांसफर की गई थी. पुलिस जांच में इन खातों को संदिग्ध पाते हुए फ्रीज कर दिया गया, जिसके बाद संबंधित पंप संचालकों को कानूनी कार्रवाई और पूछताछ का सामना करना पड़ा.
इस घटना के बाद से पंप संचालकों ने एहतियात के तौर पर डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर दिया. नतीजतन, उपभोक्ताओं को भुगतान के समय परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और यह मुद्दा अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है.
इस संबंध में पेट्रोल पंप संचालक एवं समाजसेवी प्रदीप मंडल ने बताया कि ऑनलाइन भुगतान पर कोई सरकारी रोक नहीं है, बल्कि यह कदम केवल सावधानी के तौर पर उठाया गया है. उन्होंने कहा कि यदि किसी ग्राहक को आपात स्थिति में डिजिटल भुगतान करना होता है, तो उसका नाम, मोबाइल नंबर और पहचान दर्ज कर भुगतान स्वीकार किया जाता है.
प्रदीप मंडल ने बताया कि कुछ महीने पहले एक पंप संचालक को गलत भुगतान के कारण भारी आर्थिक और कानूनी परेशानी झेलनी पड़ी थी. इस घटना के बाद जिले के सभी पंप संचालकों ने बैठक कर सामूहिक निर्णय लिया और बीपीसीएल व ईसीएल जैसी संबंधित कंपनियों को इसकी जानकारी दी.
वहीं उपभोक्ता मंजीर अंसारी ने कहा कि डिजिटल भुगतान से सुविधा होती है, लेकिन साइबर ठगी के डर से यह सुविधा बंद कर दी गई है, जिससे अब नकद भुगतान ही एकमात्र विकल्प बचा है.
जिले के उपायुक्त ने कहा कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से सावधानी बरतना आवश्यक है, लेकिन डिजिटल लेन-देन पूरी तरह सुरक्षित माध्यमों से किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पंप संचालक यदि चाहें तो समन्वय स्थापित कर सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणाली अपना सकते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सके.

