जामताड़ा/ Manish Baranwal एसबीआई कुरुवा शाखा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. बैंक में प्रतिनियुक्त चौकीदार मनोज तुरी बीते करीब एक माह से ड्यूटी से नदारद हैं, जिससे बैंक की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है. कर्माटांड़ अंचलाधिकारी के पत्रांक संख्या 1093 दिनांक 4 नवंबर 2025 के तहत चौकीदार मनोज कुमार बिट नंबर 2/6 को सुरक्षा गार्ड के रूप में एसबीआई कुरुवा शाखा में प्रतिनियुक्त किया गया था.

बताया जा रहा है कि कुछ दिनों तक ड्यूटी करने के बाद 15 नवंबर 2025 से चौकीदार बिना किसी सूचना के गायब हो गया. इस लापरवाही से बैंक की दैनिक सुरक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है. मामले को गंभीरता से लेते हुए शाखा प्रबंधक ने कर्माटांड़ अंचल अधिकारी को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है. साथ ही जामताड़ा उपायुक्त को भी ईमेल के माध्यम से जानकारी दी गई है.
शाखा प्रबंधक ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि चौकीदार की अनुपस्थिति से किसी भी अप्रत्याशित घटना की आशंका बनी हुई है. सुरक्षा का दायित्व अंचल अधिकारी द्वारा सौंपा गया था, लेकिन चौकीदार के गायब रहने से बैंक कर्मी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं. यह स्थिति न केवल बैंक की वित्तीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि ग्राहकों के भरोसे को भी कमजोर कर रही है.
स्थानीय स्तर पर चौकीदार मनोज कुमार को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं. प्रखंड 28 सूत्री उपाध्यक्ष कयूम अंसारी एवं स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि वह ड्यूटी से गायब रहने के दौरान कथित रूप से कर्माटांड़ थाना प्रभारी के निजी काले रंग के स्कॉर्पियो वाहन को चलाते हुए देखा गया है. इस जानकारी के बाद क्षेत्र में लोगों का आक्रोश बढ़ गया है.
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में इसी क्षेत्र के पास स्थित कालाझरिया बैंक शाखा में 4.20 लाख रुपये की लूट की घटना हो चुकी है. उस घटना की याद आज भी लोगों के जेहन में ताजा है. ऐसे में सुरक्षा में लापरवाही को लेकर दोबारा किसी बड़ी वारदात की आशंका जताई जा रही है.
हालांकि इस मामले में पुलिस अधीक्षक राजकुमार मेहता ने बताया कि कर्माटांड़ थाना प्रभारी से मिली जानकारी के अनुसार चौकीदार एक दुर्घटना में घायल हैं और चिकित्सीय सलाह पर बेड रेस्ट पर हैं. इसके बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि सीमावर्ती क्षेत्र में ऐसी प्रशासनिक लापरवाही कितनी उचित है. क्या थाना स्तर पर वैकल्पिक चौकीदार की व्यवस्था नहीं की जा सकती थी. लोगों का कहना है कि घटना घटने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि प्रशासन समय रहते सजग हो और किसी अनहोनी को रोके.

