जामताड़ा: झारखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ ईरफ़ान अंसारी के गृह जिले के बच्चों का भविष्य खतरे है. समय रहते यदि इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है और सैंकड़ो स्कूली बच्चे काल के गाल में समा सकते हैं.

दरअसल जामताड़ा जिले के मिहिजाम अंचल के उत्क्रमित मध्य विद्यालय कानगोई में हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि यहां पढ़ने वाले 318 छात्र और 7 दिव्यांग विद्यार्थी हर दिन मौत के साए में क्लास करने को मजबूर हैं. स्कूल की छत को छूते हुए 11 हजार वोल्ट का हाई-टेंशन तार गुजर रहा है, जो किसी भी क्षण बड़ा हादसा कर सकता है. बावजूद इसके प्रशासन, शिक्षा विभाग और बिजली विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में है.
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार बीते कई वर्षों से विभागीय अधिकारियों को इस गंभीर समस्या की जानकारी दी गई है. मिहिजाम विद्युत केंद्र से लेकर शिक्षा विभाग तक कई बार पत्र भेजे गए, परंतु हाई-टेंशन तार हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. फाइलें घूमती रहीं और बच्चे रोजाना खतरे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर रहे. स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के दिनों में स्कूल की छत में करंट फैलने की आशंका कई गुणा बढ़ जाती है. खुले और नंगे तारों से किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है. पुराने तारों के कारण आग लगने का खतरा भी बना रहता है. अभिभावकों और ग्रामीणों ने हाई-टेंशन तार को अविलंब स्कूल से हटाने या भूमिगत करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि प्रशासन क्या किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है.
कक्षा आठ के छात्र राहुल पंडित, रचना कुमारी, दिशा कुमारी सहित कई बच्चों ने बताया कि सभी बच्चे भय के माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं. उन्हें हर पल डर रहता है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए. कक्षा छह की छात्रा नताशा कुमारी और कक्षा चार की छात्रा किरण ने कहा कि स्कूल में पढ़ाई से ज्यादा डर लगता है.
वहीं विद्यालय की प्रधानाध्यापिका नेली ब्लेक ने बताया कि वर्ष 2016 से ही वह इस समस्या से जूझ रही हैं. उनके अनुसार स्कूल के ऊपर से गुजरता हाई-टेंशन तार हमेशा चिंता का कारण बना हुआ है. बीते वर्ष जिला शिक्षा अधीक्षक और बिजली विभाग को लिखित सूचना दी गई थी, लेकिन समाधान आज तक नहीं हुआ. इस मामले पर जब विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता अभिषेक आनंद से बात की गई तो उन्होंने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया. कुछ देर बाद मिहिजाम विद्युत केंद्र के कर्मियों ने भी विद्यालय से आवेदन प्राप्त होने की पुष्टि की. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तार हटाना आसान नहीं है क्योंकि इसके लिए पूरे क्षेत्र की लाइन और पोल को बदलना पड़ेगा. इस बात पर कार्यपालक अभियंता ने प्रयास करने की बात कही, पर समाधान अब भी अधर में है.
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि 318 बच्चों की जिंदगी सुरक्षित रह सके. बच्चों की जान जोखिम में डालकर शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है.

