जामताड़ा/ Manish Baranwal जिले में नेशनल हाईवे-419 पर बुधुडीह के पास बना नया पुल लोगों के लिए खतरे का कारण बन गया है. राहत के उद्देश्य से तैयार किया गया यह पुल निर्माण के तुरंत बाद ही दरारों से भर गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है.


स्थानीय लोगों के अनुसार पुल की स्थिति इतनी खराब है कि जैसे ही कोई वाहन उस पर गुजरता है, पूरा ढांचा कांपने लगता है. पुल में पड़ी दरारें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि नीचे की सड़क तक दिखाई दे रही है. ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी समय यह पुल भरभराकर गिर सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है.
इस मामले में एक गंभीर आरोप यह भी सामने आया है कि पुल का निर्माण कार्य कथित रूप से रात के अंधेरे में किया गया. दिन में कागजी प्रक्रिया और रात में निर्माण होने की बात से निर्माण कार्य में अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंका और गहरा गई है.
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. ग्रामीण किशोर मंडल, नसीम अंसारी और रऊफ अंसारी ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण में बेहद घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है. उनका कहना है कि सीमेंट और गिट्टी इतनी कमजोर है कि हाथ से ही टूट जा रही है.
ग्रामीणों का आरोप है कि जल्दबाजी में गुणवत्ता की अनदेखी कर पुल का निर्माण किया गया, जिसके कारण बनते ही यह जर्जर हो गया. लोगों ने इसे ‘मौत का जाल’ बताते हुए कहा कि यह पुल कभी भी किसी की जान ले सकता है.
अब सवाल उठ रहा है कि इस पुल के निर्माण की जिम्मेदारी किस एजेंसी की थी, किस स्तर पर इसकी निगरानी हुई और सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. साथ ही उपायुक्त से यह भी मांग की गई है कि इस खतरनाक पुल को तत्काल ध्वस्त कर गुणवत्तापूर्ण तरीके से दोबारा निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके.
फिलहाल, जामताड़ा में यह पुल सुविधा के बजाय एक खामोश खतरे के रूप में खड़ा है, जो हर गुजरते पल के साथ हादसे की आशंका बढ़ा रहा है.

