जमशेदपुर/ Afroz Mallik बिष्टुपुर स्थित हज़रत बादशाह अब्दुल रहीम उर्फ़ चुना शाह बाबा मजार शरीफ परिसर के यासीन मस्तान चौकी से मंगलवार को अजमेर शरीफ के 814वें उर्स में शामिल होने के लिए एक परंपरागत जत्था दिल्ली के लिए ट्रेन से रवाना हुआ. हर वर्ष की तरह इस बार भी यह जत्था ख़्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह के उर्स मुबारक में परंचम यानी छड़ी और झंडा लेकर पैदल यात्रा करेगा.

इस वर्ष अजमेर शरीफ में उर्स मुबारक का आगाज 24 दिसंबर से हो रहा है, जिसमें देश और विदेश से लाखों जायरीन शामिल होते हैं. जमशेदपुर से रवाना यह जत्था पहले दिल्ली पहुंचेगा और इसके बाद वहां से पैदल यात्रा की शुरुआत करते हुए अजमेर शरीफ दरगाह में परंचम बांधकर हाज़िरी देगा.
यासीन मस्तान कमेटी के सदस्य मोहम्मद अफरोज़ उर्फ मंगलू ने बताया कि भारत के कोने-कोने से बाबा के चाहने वाले फकीर, मस्तान और वे युवक जो किसी मन्नत के साथ आते हैं, सभी इस पैदल यात्रा में शामिल होते हैं. कई लोग अपनी मुराद पूरी होने पर कृतज्ञता स्वरूप पैदल यात्रा करते हुए अजमेर शरीफ पहुँचते हैं. उन्होंने बताया कि परंपरागत छड़ी 9 दिसंबर को दिल्ली के महरौली स्थित हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह से रवाना होगी और लगभग 500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए 22 दिसंबर को अजमेर शरीफ पहुंचेगी.
यात्रा के दौरान जत्थे के सदस्यों के लिए भोजन, ठहराव और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की जाती है. रास्ते में कई स्थानों पर स्थानीय लोग जायरीनों का स्वागत और सेवा करते हैं. जत्था रवाना होने से पूर्व चुना शाह बाबा मजार शरीफ में दुआ-खैर की गई और सभी जायरीनों की सुरक्षित व सफल यात्रा की कामना की गई. रवाना होते समय जत्थे में शामिल लोगों में जबरदस्त उत्साह और आस्था का माहौल देखा गया.

