जमशेदपुर: नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय (एनएसयू) ने बाल दिवस और झारखंड स्थापना दिवस के मौके पर तीन दिवसीय जीवंत उत्सव का आयोजन किया. विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक आयोजन समिति और विभिन्न विभागों के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस समारोह का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों, उनकी रचनात्मकता और झारखंड राज्य गठन आंदोलन की भावना को उजागर करना था.

कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि, कुलसचिव नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोआइज अशरफ सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्यों द्वारा किया गया. तीन दिनों तक चले इस उत्सव में विद्यार्थियों ने चित्रकला, वाद-विवाद, निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी सहित कई प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. सभी प्रतियोगिताएँ बच्चों के कल्याण, शिक्षा और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखकर आयोजित की गई थीं.
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बाल-संबंधी मुद्दों पर आधारित दो लघु फ़िल्मों और झारखंड निर्माण आंदोलन पर तैयार एक वृत्तचित्र का विशेष प्रदर्शन रहा. इन फ़िल्मों की संकल्पना, शूटिंग और संपादन विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों द्वारा किया गया, जो दृश्य कथावाचन में उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को दर्शाता है.
तीसरे दिन समापन सह पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया. अपने उद्बोधन में कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि बाल दिवस हमें एक ऐसे वातावरण को निर्मित करने की याद दिलाता है जहाँ हर बच्चा निर्भय होकर सपने देख सके, सीख सके और प्रगति कर सके. यह अवसर तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब इसे झारखंड स्थापना दिवस के साथ जोड़ा जाता है क्योंकि इससे हम अपने राज्य की पहचान, संस्कृति और संघर्ष की गौरवशाली गाथा को पुनः स्मरण करते हैं. विद्यार्थियों ने फिल्म और कला के माध्यम से इन विषयों को जिस संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है, वह सराहनीय है.
कुलसचिव नागेंद्र सिंह ने भी उत्सव की सफलता पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि मूल्यों—जागरूकता, ज़िम्मेदारी और रचनात्मकता—का उत्सव है. हमारे विद्यार्थी झारखंड के उज्ज्वल भविष्य के सृजनकर्ता हैं और उनका उत्साह एनएसयू की वास्तविक भावना को व्यक्त करता है.
फिल्मों की संकाय सदस्यों ने की सराहना
संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने फिल्मों की विशेष सराहना की, जिनमें बाल सुरक्षा, शिक्षा में असमानता और झारखंड आंदोलन से जुड़े संघर्षों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया था. इन फिल्मों ने एक ओर जहाँ शिक्षा का नया माध्यम प्रस्तुत किया, वहीं विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच को भी प्रदर्शित किया.
कार्यक्रम का समापन विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरण और आयोजन समिति की ओर से धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया. समारोह में विभिन्न विभागों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे.
अंत में विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने, सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.


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