चाईबासा/ Jayant Pramanik जिले के सोनुआ प्रखंड के रामचंद्रपोस संत पीटर रोजलिन स्कूल में शनिवार को मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और सावित्रीबाई फुले की जयंती धूमधाम से मनाई गई. कार्यक्रम का आयोजन आखिल झारखंड जागृति विकास मंच द्वारा किया गया. मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी उदय भानू पूर्ति और पीएम श्री उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक चम्पाई चंद्र शेखर डांगील उपस्थित रहे.

अतिथियों और स्कूल के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने संयुक्त रूप से मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और सावित्रीबाई फुले के चित्रों में माल्यार्पण और धूप अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

उदय भानू पूर्ति ने जयपाल सिंह मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की. 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की और भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया. वह संविधान सभा के सदस्य भी थे और आदिवासी समाज के लिए ‘आदिवासी’ शब्द के इस्तेमाल और पृथक झारखंड राज्य की मांग को प्रमुखता से उठाया.
उन्होंने ‘आदिवासी महासभा’ का गठन किया, जो बाद में झारखंड आंदोलन का मुख्य आधार बनी.
सावित्रीबाई फुले के जीवन परिचय में बताया गया कि उन्होंने अपने पति के सहयोग से 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए भारत का पहला स्कूल खोला. उन्होंने छुआछूत, सती प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और विधवाओं के कल्याण के लिए ‘बालहत्या प्रतिबंधक गृह’ की स्थापना की. उनके कविता संग्रह ‘काव्य फुले’ और ‘बावनकशी सुबोध रत्नाकर’ आज भी सामाजिक क्रांति की प्रेरणा देते हैं. बच्चों को उनके जैसे बनने और उज्ज्वल भविष्य बनाने की प्रेरणा दी गई.
बताया कि आगामी 2027 में उनके नाम पर रामचंद्रपोस स्कूल मैदान में हॉकी खेल का आयोजन भी किया जाएगा. कार्यक्रम में स्कूल के प्रधानाध्यापक चूमार सिंह सुरीन, सुयोग महतो, अंतू राम केराई, विशाल बानरा, सबिता सिंकू, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

