नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद भारत के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है. विपक्षी दलों ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कड़ी प्रतिक्रियाएं दी हैं.

राजद नेता तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “50% टैरिफ से देश को भारी नुकसान हो रहा है. ये लोग इस पर कोई बात नहीं कर रहे हैं. अब ये लोग देश का नुकसान करके बिहार आएंगे और कहेंगे कि हम विश्व गुरू बन गए हैं. हम किस बात के विश्व गुरू हैं ?”
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी अमेरिका की नीति पर आपत्ति जताते हुए कहा, “अगर उनके साथ हमारा 90 बिलियन डॉलर का व्यापार है और हर चीज़ 50% महंगी हो जाएगी, तो खरीदार भी सोचेंगे कि भारतीय चीजें क्यों खरीदें ? अगर अमेरिका ऐसा करता है, तो हमें भी उनके निर्यात पर 50% टैरिफ लगाना चाहिए. कोई भी देश हमें यूं धमका नहीं सकता.
झारखंड मुक्ति मोर्चा की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा, हमें अपनी विदेश नीति पर गौर करने की जरूरत है. इससे महंगाई बढ़ेगी लेकिन भारत के लोग हर तरह से जीना जानते हैं. इस समय भारत को सोच- समझकर काम करना चाहिए. ऑपरेशन सिंदूर के बाद देखा जा रहा है कि कोई देश भारत की मदद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ा रहा.
वहीं कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने ट्रम्प के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा, यह बहुत गलत है. किसी नेता का किसी देश के लिए ऐसा कहना ठीक नहीं है. हमारी विदेश नीति भले कमजोर हो, लेकिन हमें इसका डटकर मुकाबला करना चाहिए. पूरा देश एकजुट है.
इधर भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा रूसी तेल की खरीद पर भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने पर कहा, भारत एक बहुत बड़ा उपभोक्ता बाजार वाला देश बन चुका है और भारत का जो उत्पादन है वो अपने देश की आवश्यकताओं के अनुकूल बहुत तेजी के साथ बढ़ा है. हम आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़े हैं. हमारे कृषि व्यवस्था आज संतुलित व्यवस्था में पहुंच चुकी है और हम तो सबसे अच्छे संबंध चाहते हैं लेकिन अगर कोई देश ये समझता हो कि भारत अपने किसानों की बलि देकर अपने छोटे- छोटे उद्योग और माध्यम श्रेणी के उद्योगों की बलि देकर किसी देश को खुश करेगा तो वो जमाना गया. भारत सबका सम्मान करने वाला देश है लेकिन भारत न किसी को झुकाता है और न किसी के दबाव में झुकता है. नेताओं की इन प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि अमेरिका की प्रस्तावित टैरिफ नीति को लेकर देश में राजनीतिक असहमति गहराती जा रही है. वहीं, विपक्ष ने केंद्र सरकार की कूटनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं.

