DESK राज्य आज हूल क्रांति के नायकों सिदो- कान्हू, चांद- भैरव, फूलो- झानो सहित उन हजारों क्रांतिकारियों को नमन कर रहा है जिन्होंने झारखंड के जल- जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. इसको लेकर राज्य के तमाम सरकारी संस्थान, कोर्ट एवं सरकारी शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित किए गए हैं. इन सबसे इतर राज्य के निजी स्कूल खुले रहे.

सरायकेला एवं जमशेदपुर के ज्यादातर स्कूल हूल दिवस के मौके पर खुले रहे जो यह दर्शाता है कि उन्हें राज्य के क्रांतिकारियों से कोई लेना देना नहीं है. राज्य के क्रांतिकारियों की जीवनी से सम्बंधित पाठ पढ़ाना जरूरी है मगर उनकी जयंती और उनसे संबंधित दिवसों पर स्कूलों को एक दिन के लिए बंद करना जरूरी नहीं है.
इस बावत जब जिला शिक्षा अधीक्षक सरायकेला से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाईल नम्बर नॉट रिचेबल मिला, जबकि जमशेदपुर जिला शिक्षा अधीक्षक ने फोन ही नहीं उठाया. हालांकि सरायकेला प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी दिनेश दंडपात ने इसे एक गंभीर मामला बताया और कहा इसकी जांच कराई जाएगी. सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार की ओर से निजी स्कूलों के लिए हूल दिवस को लेकर कोई गाइडलाइन जारी किए गए थे ? यदि जारी किए गए थे तो उसका अनुपालन क्यों नहीं हुआ ?
