गम्हरिया: गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत महुलडीह स्थित यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसील) माइंस क्षेत्र में मंगलवार को ठेका मजदूरों और विस्थापित-प्रभावित परिवारों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार जनसभा की. माइंस गेट के समीप फुटबॉल मैदान में आयोजित सभा में प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी गई. वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन गेट जाम सहित उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा.

सभा में सिंहभूम की सांसद जोबा माझी भी पहुंचीं. उन्होंने किसानों और मजदूरों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि विकास के नाम पर जिन लोगों ने अपनी जमीन और श्रम दिया, उनके अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने दो टूक कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी और सम्मान के बिना किसी भी परियोजना की सफलता अधूरी है.
जनसभा में विस्थापित परिवारों ने बताया कि वर्ष 2007 में माइंस स्थापना के समय रोजगार, पुनर्वास, गांवों के समग्र विकास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था. भालूबासा और महुलडीह के ग्रामीण प्रतिनिधियों ने कहा कि गांवों को गोद लेकर विकास करने की बात कही गई थी, लेकिन आज तक अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं देती.
सभा को सांसद प्रतिनिधि कालीपद सोरेन ने भी संबोधित किया. झारखंड क्रांतिकारी ठेका मजदूर यूनियन के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में सेवा शर्तों में सुधार, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार, विस्थापित परिवारों के समुचित पुनर्वास और कंपनी के सामाजिक दायित्वों के प्रभावी निर्वहन की मांग प्रमुखता से उठाई गई.
सभा स्थल पर सांसद का पारंपरिक रीति-रिवाज से स्वागत किया गया. जनसभा के बाद सांसद जोबा माझी सीधे माइंस परिसर पहुंचीं और यूसील प्रबंधन के साथ वार्ता की. उन्होंने मजदूरों और विस्थापितों की मांगों को बिंदुवार रखते हुए त्वरित समाधान की आवश्यकता पर बल दिया.
वार्ता के दौरान रोजगार, ठेका मजदूरों की स्थिति, स्थानीय प्राथमिकता और अन्य लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों के बच्चों के केंद्रीय विद्यालय में नामांकन और कैंटीन संचालन जैसे कुछ बिंदुओं पर सहमति जताए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि अन्य मांगों पर अंतिम निर्णय अभी शेष है.

