गम्हरिया: Bipin Varshney प्रखंड परिसर स्थित राशन गोदाम में मंगलवार देर रात लगभग 1:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई. इस हादसे में एजीएम अभिषेक हाजरा और ट्रांसपोर्टर राजू सेनापति गंभीर रूप से झुलस गए. दोनों को स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों के अनुसार दोनों की स्थिति नाजुक बनी हुई है.

घटना का कारण अब तक स्पष्ट नहीं
घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.आग इतनी तीव्र थी कि गोदाम में रखा खाद्यान्न, अभिलेख और कुछ उपकरण पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए. प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, वहीं फायर ब्रिगेड की टीम ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया.
घायलो की हालत गंभीर
एजीएम अभिषेक हाजरा और ट्रांसपोर्टर राजू सेनापति, दोनों करीब 70 से 80 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं. अस्पताल सूत्रों के मुताबिक दोनों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है. प्रखंड और जिला प्रशासन के अधिकारी अस्पताल पहुंचकर हालात की जानकारी ले रहे हैं.
हादसे पर सियासत तेज, बयानबाज़ी ने मानवता को किया शर्मसार
इस दर्दनाक घटना के बाद जहां विभागीय कर्मचारी और स्थानीय लोग मदद में जुटे हैं, वहीं कुछ तथाकथित जनप्रतिनिधि और राजनीतिक कार्यकर्ता इस घटना को “राजनीतिक अवसर” में बदलते नजर आ रहे हैं. कुछ नेताओं ने मीडिया के माध्यम से खाद्यान्न वितरण में अनियमितता और एजीएम पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं.
यहां सवाल उठता है कि—
जब वही नेता कहते हैं कि उनके पास कार्डधारियों और डीलरों से लगातार शिकायतें आ रही थीं, तब उन्होंने कार्रवाई या शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई ?
क्या उस समय जनसेवा की भावना दब गई थी, या अब मीडिया की सुर्खियों में आने का मौका देखकर “संवेदना” की जगह “सियासत” हावी हो गई है ?
प्रशासन और विभाग के लिए चेतावनी का संकेत
यह घटना न केवल एक दर्दनाक हादसा है, बल्कि विभागीय प्रणाली के लिए भी एक गम्भीर संदेश है. खाद्यान्न भंडारण, सुरक्षा प्रबंधन और निरीक्षण व्यवस्था में लापरवाही के संकेत पहले से मौजूद थे. अगर समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो संभवतः यह हादसा टाला जा सकता था.
साथ ही, यह भी आवश्यक है कि विभाग अपने भीतर फैले भ्रष्टाचार और ढिलाई को दूर करे. पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि न केवल पीड़ितों को न्याय मिले बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
जनता की अपेक्षा- सियासत नहीं, समाधान चाहिए
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह वक्त आरोप- प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि विभागीय सुधार का है. जनप्रतिनिधियों को मानवता का परिचय देते हुए घायलों की मदद में आगे आना चाहिए, न कि मीडिया के माध्यम से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करनी चाहिए. यह आग सिर्फ एक गोदाम में नहीं लगी है- यह व्यवस्था की लापरवाही और राजनीति की संवेदनहीनता का प्रतीक बन गई है.
मेरे पति पर लांछन लगाने वालों को लगेगी आह: नित्या हाजरा
अपने पति के लिए अस्पताल के बाहर ऊपर वाले से प्रार्थना करती एजीएम अभिषेक हाजरा की पत्नी नित्या हाजरा ने नेताओं द्वारा किए जा रहे अनर्गल बयानबाजी से आहत होकर बताया कि इस दु:खद घड़ी में जिस तरह से कुछ नेता अपनी राजनीति साधने के लिए अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं उन्हें कम से कम एक बार अस्पताल आकर मेरे पति से मिल लेना चाहिए ताकि उन्हें यह पता चल सके कि वास्तविक घटना क्या हुई है. यदि मेरे प्रति भ्रष्टाचार में लिप्त थे तो उसकी जांच होनी चाहिए मगर उन नेताओं और डीलरों के बयानों की भी जांच होनी चाहिए जो मेरे पति पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उन्हें बदनाम कर रहे हैं वो भी उस अवस्था में जब वे जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं. अंत में भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि यदि मेरे पति को कुछ भी हुआ तो उन सभी को बद्दुआ लगेगी जो उनके इस अवस्था में होते हुए अपनी राजनीति चमकाने के लिए गलत बयानबाजी कर रहे है.

