सरायकेला: गम्हरिया प्रखंड परिसर स्थित सरकारी अनाज गोदाम (JSFCI) में बीते मंगलवार को हुए अग्निकांड में झुलसे डीएसडी ठेकेदार राजू सेनापति ने सोमवार को दम तोड़ दिया जिसके बाद परिजनों में कोहराम मचा हुआ है. इस बीच सोमवार देर शाम डीएसओ पुष्कर सिंह मुंडा मृत राजू सेनापति के घर पहुंचे और अपनी संवेदना प्रकट किया मगर परिजनों ने उनसे बात करने से इंकार कर दिया.

दरअसल परिजन विभाग के असंवेदनशील रवैये और एक बड़े मीडिया समूह के नकारात्मक रिपोर्ट से नाराज हैं. परिजनों ने बताया कि राजू रिकवर कर रहा था. वह अस्पताल में चलफिर रहा था. यहां तक कि खाना- पीना भी शुरू कर दिया था. रविवार देर शाम से उसकी तबियत अचानक बिगड़ने लगी.
डॉक्टरों के अनुसार अचानक से उसका शुगर लेवल गिरने लगा और पल्स रेट बिगड़ने लगा सोमवार सुबह होते- होते उसकी तबियत आउट ऑफ़ कंट्रोल हो गई अंततः उसे बचाया नहीं जा सका. हालांकि डॉक्टर शुरू से ही इस बात पर जोर दे रहे थे कि बर्निग केस में कभी भी कुछ भी हो सकता है इसके लिए मरीज को अंदर से स्ट्रांग होना जरूरी है साथ ही किसी तरह के भी तनाव से उन्हें दूर रखने की सलाह दी थी.
गौरतलब है कि घटना में राजू सेनापति 65 फ़ीसदी जला था जबकि गोदाम प्रबंधक अभिषेक हजरा 80 फ़ीसदी जला है. उसकी भी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. राजू को लेकर डॉक्टर थोड़े सहज लग रहे थे मगर उसकी सांसों की डोर थम गई.
इस पूरे प्रकरण में विभाग के अधिकारियों (एमओ, बीसीओ और डीएसओ) और एक बड़े अखबार में छपे नकारात्मक रिपोर्ट पर उंगलियां उठने लगे हैं. मालूम हो कि घटना के बाद उपायुक्त ने एक जांच टीम का गठन किया है. जांच टीम में जिला परिवहन पदाधिकारी गिरजा शंकर महतो, जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी पुष्कर सिंह मुंडा, पूर्व प्रभारी जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी सह कार्यपालक दंडाधिकारी सत्येंद्र महतो एवं रिसर्च एसोसिएट सुनील द्विवेदी शामिल हैं. मजे की बात ये है कि जांच टीम ने आज तक रिपोर्ट प्रतिवेदन नहीं सौंपा है. जबकि रिपोर्ट सौंपने की मियाद तीन नवम्बर तक ही है. इतना ही नहीं विभाग की ओर से अबतक मामले में किसी के खिलाफ नामजद एफआईआर तक दर्ज नहीं कराया है. इस बीच एक बड़े अखबार समूह की ओर से भ्रामक खबरें प्रकाशित कर गोदाम प्रबंधक अभिषेक हाजरा, डीएसडी ठेकेदार राजू सेनापति और डाटा ऑपरेटर अशोक शर्मा को दोषी ठहरा दिया गया. यहां तक कि रिपोर्ट में कई संदिग्ध दावे भी किए गए. मीडिया रिपोर्ट में जांच टीम के बयानों के आधार पर दावा किया गया कि कांड के वादी डाटा ऑपरेटर अशोक शर्मा विभागीय जांच में सहयोग नहीं कर रहा है. उसने अपना मोबाइल बंद कर रखा है और फरार है. जबकि, अशोक शर्मा लगातार टाटा मुख्य अस्पताल में इलाजरत अभिषेक हाजरा और राजू सेनापति के लिए पैसों के प्रबंध में जुटा हुआ था. पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर उपस्थित भी हुआ था. ऐसे में भ्रामक रिपोर्ट प्रकाशित किया गया या करवाया गया यह बड़ा सवाल है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजू से पुलिस ने अस्पताल में बयान भी लिया है. उसके बाद किसी ने मीडिया में छपी रिपोर्ट की जानकारी उसके जेहन में डाल दिया कि उसके स्वस्थ्य होते ही पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी. उसके बाद स्वस्थ हो रहे राजू सेनापति के स्वास्थ्य में अचानक गिरावट आ गई और उसने दम तोड़ दिया.
क्षेत्र में अब इसकी चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि विभाग के अधिकारी अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के उद्देश्य से कंप्यूटर ऑपरेटर अशोक शर्मा को फसाने का तिकड़म भिड़ा रहे है. विभाग को अच्छी तरह से पता है कि इस पूरे प्रकरण की पटकथा कैसे लिखी गई. अभिषेक हाजरा, राजू सेनापति और अशोक शर्मा इस पूरे घटनाक्रम के एक प्यादा है. असल खिलाड़ियों की एंट्री अभी मैदान में नहीं हुई है. पुलिसिया जांच में वास्तविकता सामने ना आए इसको लेकर पर्दे के पीछे बैठे खिलाड़ी तरह- तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. एक मोहरा राजू सेनापति दुनिया से चला गया. अभिषेक हाजरा की यदि मौत हो जाती है उसके बाद अकेला बच जाएगा डाटा ऑपरेटर अशोक शर्मा जिसका विभाग में यही हैसियत है कि वह एक संविदाकर्मी है, उसे सभी मिलकर फंसा देंगे और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा.
इस प्रकरण को बल तब और मिला जब राजू की मौत के बाद रात के अंधेरे में जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी शोकाकुल परिजनों से मिलने उसके घर पहुंचे. जबकि घटना के बाद से लगातार उनकी ओर से नकारात्मक बयान मीडिया की सुर्खियां बन रही थी. राजू या अभिषेक का इलाज कैसे हो रहा है विभागीय स्तर पर इसकी कोई पहल नहीं की गई. अब जब राजू दुनिया में नहीं रहा तो डीएसओ उसके परिजनों को किस बात की सांत्वना देने पहुंचे ? सूत्र बताते हैं कि डीएसओ राजू के परिजनों को सरकारी गवाह बनने के लिए प्रेरित करने पहुंचे थे, मगर परिजनों की नाराजगी जान वह सहम गए. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी (DSO), मार्केटिंग ऑफिसर (MO) ब्लॉक कोऑपरेटिव ऑफिसर (BCO) और मिडिया को जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया जाए ? इस खेल का एक और बड़ा खिलाड़ी हरिदत्त तिवारी उर्फ़ भोला तिवारी भी है उसकी भूमिका की भी जांच जरुरी है.
कुल मिलाकर कहें तो इस पूरे प्रकरण में गम्हरिया अनाज गोदाम में लगे आग की राख से दबाकर पूरे जांच को प्रभावित करने की बड़े पैमाने पर साजिश रची जा रही है ताकि प्यादे फंस जाएं और असल खिलाड़ी पाक- साफ निकल जाएं. ऐसे भी कयास लगने लगे हैं कि अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे अभिषेक हाजरा के जेहन में भी यह डालने का प्रयास किया जा रहा है कि राजू सेनापति अब इस दुनिया में नहीं है. हालांकि घटना के बाद परिजन पूरी सतर्कता बरत रहे हैं. अस्पताल प्रबंधन और पुलिस को सख़्ती बरतने की जरूरत है. अन्यथा चालबाज अपनी मंशा में सफल हो जायेंगे.

