गम्हरिया: जेएफएससी गोदाम अग्निकांड मामले में विभागीय अधिकारियों और डीलरों की संदिग्ध भूमिका को लेकर इंडिया न्यूज वायरल में खबर प्रकाशित होने के बाद जिला खाद्य आपूर्ति विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. खबर के प्रभाव में मंगलवार को एमओ सुनील चौधरी ने अपने चहेते डीलरों सुशील कुमार, किशोर गुप्ता, एक महिला डीलर और दलाल नरेश कुमार के साथ गुप्त बैठक की है. नरेश की पत्नी के नाम पर डीलरशिप है और विभाग में उसकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. हालांकि बैठक में हुई बातचीत का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि सुनील चौधरी पूरे प्रकरण में एक बड़े रसूखदार अधिकारी को बचाने की कोशिश में लगे हैं और इसके लिए वे डीलरों पर दबाव बनाकर अग्निकांड का ठीकरा दिवंगत एजीएम अभिषेक हाजरा, ट्रांसपोर्टर राजू सेनापति और कंप्यूटर ऑपरेटर अशोक शर्मा पर फोड़वाने की रणनीति बना रहे हैं.

गोदाम अग्निकांड की प्रशासनिक जांच भी सवालों के घेरे में है. घटना के एक पखवाड़े बाद डीएसओ द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर अशोक शर्मा पर खाद्यान्न गड़बड़ी का मामला दर्ज कराया गया है, जबकि नियमतः घटना के बाद एफआईआर विभागीय स्तर पर होनी चाहिए थी. मगर घटना का सूचक विभागीय दबाव में कंप्यूटर ऑपरेटर अशोक शर्मा बना. पुलिस अशोक शर्मा के आवेदन के आधार पर ही अब तक जांच कर रही है. शोकॉज प्रभारी एमओ और बीसीओ को भी किया जाना चाहिए था. घटना के दिन गोदाम खुलने और बंद होने की प्रक्रिया विभागीय नॉर्म्स के अनुसार हुई थी या नहीं, यह भी अब बड़ा प्रश्न है. यदि स्टॉक में गड़बड़ी थी तो एडीसी के नेतृत्व वाली जांच टीम में शामिल तत्कालीन प्रभारी एमओ सह सीओ प्रवीण कुमार ने 14 अक्टूबर को किस आधार पर क्लीन चिट दी थी.
सूत्र बताते हैं कि अग्निकांड के बाद छुट्टी पर रहे बीसीओ सुनील चौधरी द्वारा बैक डेट में एमओ का प्रभार लेने का मामला भी संदेह के घेरे में है. स्थापना बैठक कब हुई और इसकी अनुमति किसने दी, इसे लेकर भी विभागीय स्तर पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है. घटना के बाद गोदाम को तत्काल सील क्यों नहीं किया गया और बचे अनाज की गिनती किसकी मौजूदगी में हुई, यह भी बड़ा रहस्य बना हुआ है.
डीलरों की ओर से यह भी दावा किया गया है कि अक्टूबर महीने का खाद्यान्न दिए बिना एजीएम ने माल रिसीव करा लिया था. बावजूद इसके एमओ ने विभागीय पत्रांक संख्या 1149/ 8/11/2025 के तहत स्टॉक जांच नहीं कराई है. वहीं विभागीय सूत्रों की मानें तो एजीएम ने आधे से अधिक डीलरों को खाद्यान्न की डिलीवरी करवाई थी और इसका पूरा रिकॉर्ड तत्कालीन डीएसडी के पास मौजूद है, जिसे विभाग दबाने की कोशिश में लगा है.
तत्कालीन प्रभारी एमओ प्रवीण कुमार और वर्तमान एमओ (तत्कालीन बीसीओ) सुनील चौधरी पर बोलाईडीह के डीलर प्रदीप ठाकुर को बचाने का भी गंभीर आरोप है. विभागीय पत्रांक संख्या 985/ 4/10/2025 और 1046/ 15/10/2025 का अनुपालन आज तक नहीं किया गया है. सूत्र बताते हैं कि इस मामले में भारी उगाही की गई और अग्निकांड की आड़ में पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश की गई है.
अंदरखाने की मानें तो सरायकेला खाद्य आपूर्ति विभाग में वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार को छिपाने में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत रही है और इसी व्यवस्था के भीतर दिवंगत एजीएम अभिषेक हाजरा की अनजाने में बलि चढ़ गई. बताया जाता है कि उन्हें इस बात की भनक भी नहीं थी कि अग्निकांड की तपिश उनके जीवन पर इतना भारी पड़ेगी. दुख की बात यह है कि जिन अधिकारियों को बचाने के लिए उन्होंने जोखिम उठाया, वही आज उनकी मृत्यु के बाद उन्हें ही दोषी साबित करने में लगे हुए हैं. अब तो फिजाओं में इस पूरी घटना की सीबीआई जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है क्योंकि इसमें केंद्र की योजना के अनाज का हिसाब भी दबाने का खेल चल रहा है. जानकारों की राय है कि यदि इस प्रकरण की सीबीआई जांच हो जाए तो एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश संभव है.
क्रमशः….

