गम्हरिया: खरमास समाप्ति के बाद पहले माघ से मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं. कोल्हान क्षेत्र में इसे अखान जात्रा के रूप में जाना जाता है. इस दिन गृहस्थ हल की पूजा करते हैं और खेतों में हल जुताई कर कृषि कार्य प्रारंभ करते हैं. इधर सरायकेला के गम्हरिया स्थित घोड़ा बाबा मंदिर में हर साल अखान जात्रा के दिन भगवान बलराम की पूजा धूमधाम से की जाती है. भगवान बलराम को ग्राम देवता के रूप में यहां पूजा जाता है. मान्यता है, कि दो सौ साल पूर्व क्षेत्र में भीषण महामारी फैली थी. जिसके बाद पूर्वजों ने भगवान बलराम का आह्वान किया था, और यहां उनके वाहन के रूप में घोड़े का स्थापना किया था. जिसके बाद क्षेत्र से महामारी समाप्त हुई थी. तब से लेकर आज तक परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है. जिनकी मन्नते पूरी होती है, वे मिट्टी के घोड़े यहां चढ़ाते हैं. इसके अलावा प्रसाद का भोग भी लगाते हैं. वैश्विक महामारी के कारण इस साल भी केवल परंपरा का निर्वहन किया गया. सामाजिक दूरी का पालन करते हुए विधि- विधान के साथ पूजा की गई. श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण नहीं किया गया. पूजा के दौरान वैश्विक महामारी को समाप्त किए जाने की कामना की गई.


