सरायकेला: झारखंड में एक सितंबर से अंग्रेजी शराब की बिक्री एजेंसी के हाथों में सौंप दी जाएगी. इसके लिए उत्पाद विभाग जोर-शोर से तैयारी कर रहा है. हालांकि सरकार और विभागीय मंत्री पूरी पारदर्शिता का दावा कर रहे हैं, मगर विभाग के अंदरूनी हालात इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक आबकारी विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मी, जिन्हें स्थानीय लोग “विभाग के कीड़े” कहकर संबोधित कर रहे हैं, सरकार की मंशा को ठेंगा दिखा रहे हैं. बताया जाता है कि पहले से आवंटित दुकानों के मालिकों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे किराया घटाएं, अन्यथा उनकी दुकानें अन्यत्र स्थानांतरित कर दी जाएंगी. इससे दुकानदार पेशोपेश में हैं और समाधान के लिए विभाग का चक्कर काटने को मजबूर हैं.
जानकारों के अनुसार, यह पूरा मामला आंकड़ों के खेल से जुड़ा है. यदि किसी जिले में 50 शराब दुकानों की बंदोबस्ती हुई है और पहले किसी दुकान का किराया 15,000 रुपये था, तो अब उसी दुकान का किराया आधा करने का दबाव डाला जा रहा है. यदि सभी दुकानों से इसी तरह किराया घटवा लिया गया तो ठेकेदारों को पांच साल में करोड़ों रुपये का फायदा होगा. इस लाभ का बंदरबांट विभाग के अंदरूनी अधिकारियों और कर्मियों के बीच होने की आशंका जताई जा रही है.
माना जा रहा है कि इस खेल की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी है और हर जिले में करोड़ों रुपये का हेरफेर होना तय है. ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और विभागीय उच्च अधिकारियों को गंभीरता दिखानी होगी. अन्यथा, विभाग के “कीड़े” अपनी करतूतों से सरकार और बड़े अधिकारियों की साख को दांव पर लगा सकते हैं.

