खूंटी: पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन रविवार को खूंटी पहुंचे और अखिल भारतीय सरना समाज के सदस्यों के साथ आदिवासी समाज से जुड़े कई मुद्दों, विशेषकर पेसा नियमावली पर गहन चर्चा की. चम्पाई सोरेन ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि यह नियमावली पूरी तरह से आदिवासी- विरोधी है. उन्होंने कहा कि नियमावली के पहले पन्ने पर पारंपरिक ग्राम प्रधानों के अलावा “अन्य” के लिए दरवाजा छोड़ दिया गया है, जिससे मनमानी की जा सकती है.

उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में बनाई गई नियमावली में सीएनटी- एसपीटी एक्ट के उल्लंघन मामलों में ग्राम सभा को जमीन वापस करवाने का अधिकार था और शेड्यूल एरिया में जमीन के हस्तांतरण से पहले उपायुक्त को ग्राम सभा की अनुमति लेना अनिवार्य था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इन अधिकारों को हटा दिया है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “जैसे जल के बिना मछली नहीं रह सकती, वैसे ही जमीन के बिना आदिवासी संस्कृति समाप्त हो जाएगी.” उन्होंने यह भी कहा कि शेड्यूल एरिया में फैक्ट्री को जमीन मिलने पर जमीनदाताओं को केवल एकमुश्त रकम नहीं, बल्कि प्रॉफिट में हिस्सा मिलना चाहिए और जब भी फैक्ट्री बंद हो, जमीन उसके मूल मालिक को लौटाई जानी चाहिए.
चम्पाई सोरेन ने महागठबंधन सरकार पर केन्द्र द्वारा बनाए गए पेसा कानून की आत्मा को कुचलने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सीधे-सादे आदिवासियों का फायदा उठाकर कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाना चाहती है. उन्होंने ग्राम सभा की पारंपरिक व्यवस्था में राज्यपाल की भूमिका को नजरअंदाज करने और लगभग सारे अधिकार उपायुक्त को देने की निंदा की.
बैठक में समाज के सदस्यों में पेसा नियमावली को लेकर आक्रोश देखा गया और सभी ने एकजुट होकर गांव- गांव जाकर आम जनता को सरकार के आदिवासी विरोधी रवैए के खिलाफ जागरूक करने का संकल्प लिया.
इस बैठक में अखिल भारतीय सरना समाज के अध्यक्ष भीम सिंह मुंडा, नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रानी टूटी, छोटराय मुंडा, मनोज कुमार और अन्य आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे.

