दिल्ली: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों और उनके निवारण को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत प्रत्येक नागरिक को अपनी शिकायत दर्ज कराने का पूरा अवसर मिलता है, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है.

उन्होंने कहा कि सवाल यह उठ रहा था कि कुछ लोगों से फॉर्म 7 और कुछ लोगों से शपथ पत्र क्यों मांगा जा रहा है. इसका उत्तर यह है कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है. यदि आप उस विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक हैं, तो आपके पास फॉर्म 6, फॉर्म 7 और फॉर्म 8 भरने का विकल्प उपलब्ध है, बशर्ते शिकायत समय पर की जाए.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने आगे स्पष्ट किया कि यदि शिकायतकर्ता उस विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक नहीं है, तो उसके लिए केवल एक ही कानूनी प्रावधान उपलब्ध है. यह निर्वाचन नियमों के पंजीकरण नियम संख्या 20, उपखंड 3, खंड बी में वर्णित है. इसके अनुसार, यदि शिकायतकर्ता संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता नहीं है, तो वह केवल गवाह के रूप में अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है. ऐसे में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी द्वारा शिकायतकर्ता को शपथ दिलाई जाएगी और यह शपथ उस व्यक्ति के समक्ष करानी होगी जिसके खिलाफ शिकायत की गई है.
उन्होंने कहा कि यह कानून और प्रक्रिया सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू है और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता. मुख्य चुनाव आयुक्त का यह बयान तब आया है जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग की निष्ठा पर सवाल उठाए हैं. उनके साथ कई विपक्षी नेताओं ने भी निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए हैं. मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है. ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त का बयान क्या मायने रखता है यह देखना दिलचस्प होगा.

