चांडिल: अनुमंडल क्षेत्र के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत झिमड़ी सोना डूंगरी में शहीद रघुनाथ महतो स्मृति समिति के बैनर तले स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी वीर शहीद रघुनाथ महतो की श्रद्धांजलि सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सभा में उपस्थित सभी अतिथियों ने बारी- बारी से मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की.


बता दें कि अंग्रेजों के अत्याचार और शोषण के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति देने वाले क्रांतिवीर स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद रघुनाथ महतो का नाम क्रांतिकारियों में प्रमुखता से लिया जाता है. उनका जन्म सरायकेला- खरसावां के नीमडीह प्रखंड के घुटियाडीह गांव में 21 मार्च 1738 को हुआ था. अंग्रेजों द्वारा जमीन, जंगल और मालगुजारी वसूली के विरोध में उन्होंने 1769 में नीमडीह में विशाल जनसभा कर विद्रोह का बिगुल फूंका. उन्होंने विद्रोह के दौरान (अपना गांव, अपना राज, दूर भगाओ अंग्रेज राज) नारा दिया था. यह विद्रोह पंचपरगना, बुण्डू, सिल्ली, सोनाहातू, रामगढ़ तक फैल गया था. रघुनाथ महतो की सेना में हजारों की संख्या लड़ाकू युवा थे, जो पारंपरिक हथियारों से लैस थे. 5 अप्रैल 1778 को सिल्ली के किता- लोटा जंगल में जब वे रामगढ़ पुलिस छावनी पर हमले की रणनीति बना रहे थे, तभी अंग्रेज सैनिकों ने घात लगाकर उन पर गोलियां बरसा दीं. रघुनाथ महतो सहित कई विद्रोही शहीद हो गए. हर साल उनके बलिदान स्थल एवं जगह- जगह पर बने मूर्ति स्थल पर हर वर्ष 5 अप्रैल को श्रद्धांजलि सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. मौके पर पद्मलोचन महतो, बासुदेब महतो, हरमोहन महतो, सुनील महतो, भरत चंद्र महतो, गुहीराम महतो, चिरंजीत महतो, पद्दलोचन महतो, मंगल चंद्र महतो सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे.
