चांडिल : (Sumangal Kundu)अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच ने सोमवार (21 अगस्त) को जल चांडिल नौका विहार में जल सत्याग्रह की घोषणा की गई है. इस संबध में मंच के राकेश विस्थापित ने कहा है कि बरसात के समय चांडिल डैम का जलस्तर हर वर्ष बढ़ता है. विस्थापितों का खेत, घर जलमग्न होता रहा है. हर वर्ष विस्थापितों को बेघर होकर भागना पड़ता था. विस्थापितों के समुचित पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होने के कारण मजबूरन उन्हें स्कूल, सामुदायिक भवन, मंदिर या किसी अन्य खाली पड़े स्थान पर बाध्य होकर जाना पड़ता है.

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि कुछ सरकारी ऑफिसरों का नारा भी था कि हमलोग विस्थापितों को उठाने नहीं जायेंगे हमारे डैम का पानी उठा लेगा. इधर नेता लोग मौके का फायदा उठाते रहे. ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के लिए विस्थापित एक राजनीतिक मुद्दा बन गये हैं. विस्थापित हित का काम करवाने के लिए ढंग नहीं है या इच्छाशक्ति नहीं रहती है. ये तो पता नहीं, परंतु कुछ वर्षों से बरसात के समय में आकर डैम खोलवाना और बंद करवाना ये खोखली राजनीति बहुत जोरों से चलती आ रही है. विस्थापितों की समस्या का समाधान हो, ये लोग नहीं चाहते. ये चाहते हैं कि विस्थापितों की समस्या बनी रहे, ताकि बीच-बीच में आकर हमलोगों को चारा डालते रहेंऔर अपनी छवि उजागर कर वोट बैंक बनाते रहें, परंतु अब ऐसा नहीं होने दिया जा रहा है क्योंकि विस्थापित जाग चुके हैं.
उन्होंने कहा है कि विस्थापितों को अपने शक्ति का अंदाजा हो गया है । 84 मौजा 116 गांव के विस्थापित 16 जून 2023 से अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हैं “अखिल झारखण्ड विस्थापित अधिकार मंच” के बैनर तले चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चल रहा है. आज विस्थापितों के सामूहिक प्रयास और मंच के कुशल नेतृत्व का ही परिणाम है कि आंदोलन से पहले जो नेता विस्थापितों के बीच गांव घर में जाकर, रोड पर भाषण देकर विस्थापितों का हितैषी होने का ढोंग करते थे आज उन्हें सदन और विधानसभा में बात रखनी पड़ रही है.
वहीं चांडिल डैम के इतिहास में जब जब जलस्तर बढ़ा रेडियल गेट खोलवाना और और उसकी सारी श्रेय लेना का एक मात्र राजनीति होता था फिर भी विस्थापित घर डूब जाता था इस साल विस्थापितों के सामूहिक प्रयास एवं मंच के कुशल नेतृत्व के कारण ही किसी भी विस्थापित के घर तक पानी नहीं घुसा डूबने नहीं दिया गया है. इससे पूर्व के धरना प्रदर्शन का अंत नेता या पदाधिकारी लोग आकर झूठा आश्वाशन वाली वार्ता करके उठवा लेते थे. इस बार का धरना प्रदर्शन में कोई आने का हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. वे जान गए हैं की अब खोखला आश्वाशन नहीं चलेगा.
84 मौजा 116 गांव के सभी विस्थापितों से उन्होंने अपील की है कि सभी मिलकर 21 अगस्त (सोमवार) को जल सत्याग्रह कार्यक्रम को सफल बनाएं.
