रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य में संचालित चर्च स्कूलों और कॉलेजों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि झारखंड में जितने भी चर्च संचालित शैक्षणिक संस्थान हैं, वे स्वयं को माइनॉरिटी संस्थान बताकर सरकारी लाभ प्राप्त करते हैं, लेकिन आरक्षण का लाभ लेने के समय आदिवासी यानी एसटी का दर्जा लेने लगते हैं.

चंपाई सोरेन ने यह बयान अपने ऑफिशियल फेसबुक पेज पर पोस्ट किया है, जिसके बाद इसे राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी संस्था एक साथ माइनॉरिटी और एसटी दोनों श्रेणियों का लाभ नहीं ले सकती. उनके अनुसार यह स्थिति सरकार को स्पष्ट करनी चाहिए ताकि नियमों का दुरुपयोग न हो.
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है.

