गम्हरिया/ Bipin Varshney पूर्व सीएम सह सरायकेला के स्थानीय विधायक चंपाई सोरेन ने विश्व आदिवासी दिवस पर अपनी वेदना प्रकट करते हुए कहा आज भी राज्य के आदिवासी नदी- नालों का पानी पीने को विवश हैं. जिस उद्देश्य के लिए विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है वह उद्देश्य आज भी पूरा नहीं हो सका है.

सैकड़ो आदिवासियों ने अपनी कुर्बानियां दी. चाहे ब्रिटिश हुकूमत हो या सामंतवादी ताकत आदिवासियों ने कभी अपने सम्मान के साथ समझौता नहीं किया मगर आज अलग झारखंड राज्य बनने के बाद भी आदिवासियों को उनका हक और अधिकार नहीं मिला. ऐसे में विश्व आदिवासी दिवस मानना प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि संघर्ष के दिनों में मैने भी कई रात जंगलों और पहाड़ों में बिताए हैं. मेरे बच्चे कब और कैसे बड़े हुए नहीं जानता. मगर ऐसा लगता है हमारा संघर्ष पूंजीपतियों और समंतवादी ताकतों के हाथों सरकार ने गिरवी रख दिया है. हमारे जल जंगल जमीन पर कब्जा किया जा रहा है. हमारी मां- बहनों की आबरू लूटी जा रही है. शहीदों के वंशजों पर लाठियां बरसाई जा रही है उन्हें जेल में डाला जा रहा है. हमारी आवाज दबाई जा रही है. इसलिए अब अंतिम लड़ाई लड़ने का समय आ गया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि 22 अगस्त को भोगनाडीह में फिर से आदिवासियों का जुटान होगा और 24 अगस्त को रांची के नगड़ी में आदिवासियों के जमीन को बिल्डरों से मुक्त कराया जाएगा. उन्होंने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि ताकत है तो उन्हें रोक ले.

