चाईबासा: विश्व आदिवासी दिवस का भव्य आयोजन चाईबासा के सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में सादगी और पारंपरिक तरीके से किया गया. इस वर्ष का कार्यक्रम दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित रहा. जिले के मनोहरपुर, गुवा, नोवामुंडी, जमशेदपुर, रांची के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी हजारों लोग शामिल हुए. कार्यक्रम की शुरुआत सभी आदिवासी समुदाय के पुजारियों द्वारा पारंपरिक पूजा-पाठ से हुई.

इसके बाद सभी समुदाय के अगुओं ने सामूहिक गोवारी अर्थात प्रार्थना की और स्व. शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए 2 मिनट का मौन रखा. कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, खरसावां विधायक दशरथ गगराई, जिला प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में अतिथि एवं स्थानीय लोग मौजूद थे.
मंच पर विभिन्न आदिवासी समुदायों ने पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए. इसमें भारत मुण्डा समाज नृत्य टीम, उराँव समाज बान टोला नृत्य टीम, नदीपार उराँव समाज नृत्य टीम, हो ट्रेडिशनल सुसुन टीम, संथाल समाज नृत्य टीम, फुलहातु उराँव समाज नृत्य टीम, पुलिस लाइन नृत्य टीम, मेरी टोला उराँव समाज नृत्य टीम और हो समाज नृत्य टीम शामिल थीं.

कार्यक्रम में आदिवासी युवाओं के भविष्य और चुनौतियां, भाषा-लिपि का संरक्षण, स्थानीय और नियोजन नीति, आदिवासी अस्मिता और पहचान, पेसा 1996, पारंपरिक व्यवस्था, स्वशासन और धर्म परिवर्तन से बचाव जैसे विषयों पर चर्चा हुई.
इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया, जिनमें अभिषेक पिंघुवा, कृति सिंह कुंटिया, प्रियंका हेम्ब्रम, संदीप बंकिरा, रसिका जामुदा, प्रीति देवगम, इपिल अंकिता हेम्ब्रम, अमनदीप बिरूवा, कश्मीरा हेम्ब्रम और अमंत पाड़ेया सहित कई अन्य शामिल थे.
कार्यक्रम स्थल पर 100 से अधिक पारंपरिक परिधान और व्यंजन के स्टॉल लगाए गए, जिनमें विभिन्न समुदायों ने अपने परंपरागत पहनावे और खानपान का प्रदर्शन किया. आयोजन को सफल बनाने में हो, मुंडा, संथाल, उराँव, बिरहोर, खड़िया, लोहार, मानकी मुंडा सहित 40 संगठनों के लोग जुड़े रहे. समिति के अध्यक्ष इपिल सामड, संयोजक गणेश पाट पिंगुआ, उपाध्यक्ष लाल कुजूर, सचिव रवि बिरुली, कोषाध्यक्ष संजय लागुरी, सह संयोजक राजकमल पाट पिंगुआ और सह सचिव अशोक कुमार नाग के साथ विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.

