पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा स्थित तांबो चौक पर हुए लाठीचार्ज का मामला अब संसद की दहलीज तक पहुंच गया है. भाजपा सांसद आदित्य साहू ने गुरुवार को राज्यसभा में शून्य काल के दौरान इस विषय को उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस-प्रशासन द्वारा लाठीचार्ज, पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल अत्यंत गंभीर और निंदनीय है. उन्होंने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की.

सांसद साहू ने कहा कि स्थानीय आदिवासी ग्रामीण तांबो चौक बाईपास पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सिर्फ नो-एंट्री की मांग कर रहे थे. ग्रामीणों का कहना था कि भारी वाहनों की आवाजाही से दुर्घटनाएं बढ़ रही थीं, इसलिए प्रशासन को इस मांग पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी. लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नियंत्रित करने के बजाय पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें कई लोग घायल हुए.
उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा 74 लोगों को नामजद किया गया है और लगभग 500 लोगों को अज्ञात आरोपित बनाते हुए केस दर्ज किया गया है. इसके अलावा 17 निर्दोष लोगों जिनमें 10 पुरुष और 7 महिलाएं शामिल हैं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
सांसद आदित्य साहू ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और समाज प्रतिनिधि जब इस मामले को लेकर उपायुक्त से मिलने पहुंचे, तो उपायुक्त के कथित अभद्र व्यवहार ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया. उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि जनता की आवाज को दबाने का प्रयास है.
सांसद ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि चाईबासा की यह घटना लोकतांत्रिक अधिकारों पर आघात है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है. उन्होंने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि ग्रामीणों को न्याय मिलना चाहिए.

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