चाईबासा/ Jayant Pramanik शिक्षा शास्त्री स्टीफन क्रैशन कहते है – “जब शिक्षक बच्चे की भाषा को पहचानता है, तो वह उसके सीखने के अनुभव को मान्यता देता है.” इन्ही विचारों के इर्द- गिर्द स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग पश्चिमी सिंहभूम और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार और एडीपीओ शिव कुमार मलिक के मार्गदर्शन में एक दिवसीय कार्यशाला होटल सैफरोन में आयोजत की गयी. कार्यशाला में विभिन्न प्रखंडों से आए स्थानीय भाषा ‘हो’ जानने वाले शिक्षकों ने भाग लिया. उन्होंने सामूहिक रूप से विचार- विमर्श कर ऐसी शब्द सूची और संकेत तैयार किए जिनसे शिक्षक बच्चों की भाषा को समझ सकें और उनके साथ सहज संवाद स्थापित कर सकें.

शुरूआती कक्षाओं में बच्चे की भाषा में शिक्षण की स्वीकार्यता और महत्त्व का देश की राष्ट्रीय शिक्षा नीति से लेकर तमाम दस्तावेज पैरवी करते है. हमारा राज्य भाषाई विविधता से भरा है. राष्ट्रीय दस्तावेजों के अनुसरण पर झारखण्ड राज्य पश्चिमी सिंहभूम के 305 स्कूलों में बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा रहा है. बच्चे की भाषा “हो” से शुरुआत कर शिक्षक बच्चों को हिंदी तक लेकर आ रहें है. इस पद्धति से प्राप्त परिणामों के आधार पर जेइपीसी झारखण्ड अब बहुभाषी शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए उन शिक्षकों को बच्चे की भाषा सिखाने की कवायद कर रहा है जो बच्चे की घर की भाषा नहीं जानते है और बच्चों से स्कूल के शुरूआती दिनों में संवाद स्थापित करने में असफल होते है.
ऐसे में शिक्षक- विद्यार्थी के बीच संवाद न होने के कारण बच्चे स्कूल में अरुचि लेने लगते है. परिमाण स्वरूप कई बच्चे स्कूल त्यागी बन जाते है. इन्हीं विषमताओं को दूर करने के लिए राज्य बच्चे की भाषा में आम बोलचाल सम्बंधित सामग्री बनाकर उन शिक्षकों को प्रशिक्षित करना चाहते हैं जो बच्चे की भाषा नहीं जानते हैं. निश्चित ही राज्य के इन प्रयासों के द्वारा शिक्षक और बच्चों के बीच बेहतर संवाद और विश्वास का संबंध बनेगा. बच्चे अपने भाषाई और सांस्कृतिक अनुभवों के साथ सीखने की प्रक्रिया में अधिक सक्रिय होंगे.
कार्यशाला में चोकरो हेस्सा, वीरसिंह सावैयां, नीतीश कुमार गुड़िया, श्रीधर महतो, जयकिशन प्रधान, उपेंद्र गोप, राजेन्द्र प्रसाद नेवार, हरिनारायण सिन्हा, शैलेश कुमार बिरुवा, निरंजन बेहरा आदि शिक्षक शामिल हुए. कार्यशाला का संचालन लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के सीमा सिंह, शैलेश कुमार, विवांशु सिंह, दीपक सांडिल, उषा कुमारी आदि ने किया.

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