चाईबासा/ Jayant Pramanik पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोआमुंडी प्रखंड के बालजोड़ी सिंदरी गोरी गांव के एक आदिवासी पिता को अपने चार माह के मासूम बेटे की मौत के बाद शव वाहन नहीं मिलने पर थैली में लाश लेकर बस से गांव जाने को मजबूर होना पड़ा. इस अमानवीय घटना के विरोध में रविवार को चाईबासा सदर अस्पताल परिसर में भाजपा ने जोरदार धरना- प्रदर्शन किया. धरना जिला अध्यक्ष संजय पांडे के नेतृत्व में आयोजित किया गया.

धरना को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने हेमंत सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी हितों की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आदिवासी परिवारों को इलाज के बाद सम्मान के साथ शव तक नसीब नहीं हो पा रहा है. उन्होंने इसे राज्य सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी तरह विफलता बताया.
गीता कोड़ा ने कहा कि डीटीओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 40 एंबुलेंस और 2 शव वाहन उपलब्ध हैं, जबकि सदर अस्पताल प्रबंधन केवल 20 एंबुलेंस होने की बात कह रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसाधन कागजों में मौजूद हैं, तो जरूरतमंदों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े जिले में प्रभावी रूप से सिर्फ एक शव वाहन का संचालन किया जाना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है.
पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि हाल ही में अस्पतालों के लिए फंड आमंत्रित किया गया, इसके बावजूद व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है. उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और मिलीभगत का परिणाम बताया. धरना के दौरान भाजपा नेताओं ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की.
धरना- प्रदर्शन में राकेश बबलू शर्मा, मुकेश सिंह, भूषण पाट पीगुवा, गीता बालमुचू, सुमन गागराई, राकेश पोद्दार, प्रताप कटियार, महतो रूप दास, राजश्री बानरा, कामेश्वर विश्वकर्मा, अंगद साव सहित सैकड़ों की संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे.

