बोकार: स्टील प्लांट के टीए डिपार्टमेंट द्वारा सेक्टर- 4 सिटी सेंटर क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ मंगलवार को बुलडोजर कार्रवाई की गई. यह कार्रवाई सुबह से पुलिस और बोकारो स्टील के सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में शुरू हुई.

कार्रवाई के दौरान विरोध कर रहे दुकानदारों के साथ सख्ती बरती गई और सुरक्षा कर्मियों द्वारा लाठी चलाने के भी आरोप लगे हैं. दुकानदारों का कहना है कि वे वर्षों से यहां छोटे-छोटे व्यवसाय के जरिए अपने परिवार का पेट पालते आ रहे हैं. एक तरफ सरकार “रोजगार और स्वरोजगार” की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ बिना वैकल्पिक व्यवस्था और पुनर्वास के गरीबों की दुकानें तोड़ी जा रही हैं.
लोगों को खींचकर हटाया गया और जान- माल की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

बताया गया है कि बोकारो स्टील के संपदा न्यायालय द्वारा पहले ही सिटी सेंटर सहित कई इलाकों में अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया गया था. नोटिस के बावजूद स्थल खाली नहीं करने पर आज बुलडोजर कार्रवाई की गई. लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ नोटिस देना ही अपनी जिम्मेदारी पूरी कर देता है.
क्या प्रशासन का यह दायित्व नहीं बनता कि जिन लोगों की रोज़ी-रोटी छीनी जा रही है, उन्हें पहले कोई वैकल्पिक स्थल या योजना दी जाए.

इस अभियान का नेतृत्व कर रहे बोकारो स्टील के डीजीएम कर्नल राजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि लोग अफवाहों में न आएं.
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बोकारो स्टील अपनी भूमि पर किसी भी हालत में अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं करेगा, चाहे वह सिटी सेंटर हो या एयरपोर्ट के सामने का इलाका.
लेकिन हकीकत यह भी है कि बोकारो स्टील लिमिटेड के एरिया में ऐसी हजारों दुकानें हैं, जो वर्षों से यहां संचालित हो रही हैं.
इन दुकानों से सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी है. अब अचानक की जा रही इस कार्रवाई से सैकड़ों लोग बेरोजगारी के मुहाने पर खड़े हो सकते हैं.
यह पूरी कार्रवाई केवल “अतिक्रमण विरोधी अभियान” नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर और छोटे दुकानदारों की रोज़ी-रोटी पर सीधा हमला भी मानी जा रही है. प्रशासन और बोकारो स्टील प्रबंधन को यह भी बताना चाहिए कि जिनकी दुकानें तोड़ी जा रही हैं, उनके पुनर्वास और रोजगार की क्या व्यवस्था की गई है. अगर यही विकास का मॉडल है तो सबसे बड़ा सवाल यही है “कि क्या बोकारो में अब गरीबों के लिए कोई जगह नहीं बची है !”

