आदित्यपुर: नगर निगम चुनाव अपने अंतिम चरण में है और 23 फरवरी को मतदान होना है. इस बार मेयर सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, जिससे सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं.

15 साल का रिपोर्ट कार्ड बनाम नए वादे
पिछले डेढ़ दशक से आदित्यपुर नगर निगम में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों का वर्चस्व रहा है. अध्यक्ष से लेकर मेयर और डिप्टी मेयर तक. बावजूद इसके, शहर को बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ा. पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने 23 फरवरी 2019 को 395 करोड़ की शहरी पेयजल आपूर्ति योजना का शिलान्यास किया था, जिसे दिसंबर 2021 तक पूरा होना था. इसी तरह 255 करोड़ की सिवेज योजना 2017 में स्वीकृत हुई थी. लेकिन 7 साल बाद भी दोनों योजनाएं अधूरी हैं. वन विभाग से जमीन की अनापत्ति तक समय पर नहीं ली जा सकी. हालात ऐसे बने कि सामाजिक संस्था जनकल्याण मोर्चा और जलाडो को 2023 में झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करनी पड़ी. इसके बाद जाकर सीतारामपुर डैम में 30 एमएलडी और सापड़ा में 60 एमएलडी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू हुआ है.
सिवेज सिस्टम: अधूरी प्लानिंग की बड़ी चुनौती
सिवेज योजना में पांच पंपिंग स्टेशन और मेन पाइपलाइन का टेंडर तो हुआ, लेकिन घर- घर से कनेक्शन की स्पष्ट योजना ही नहीं बनी. नई नगर निगम कमेटी के लिए यह सबसे बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक चुनौती होगी.
बागी, अंदरूनी खींचतान और बदलता मूड
भाजपा खेमे में बागियों की नाराजगी खुलकर सामने है. पूर्व मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक चंपाई सोरेन अब तक खुलकर प्रचार में नहीं उतरे हैं, जिससे अंदरूनी असंतोष की चर्चा तेज है. नगर निगम क्षेत्र में चर्चा है कि 15 साल के कार्यकाल से ऊबी जनता अब “नए प्रयोग” की ओर झुकाव दिखा रही है. दरअसल अब तक के कार्यकाल के दौरान नगर निगम में विकास से ज्यादा विवाद होता रहा है. कहने को तो भारतीय जनता पार्टी समर्थित प्रत्याशियों का निगम के महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा रहा मगर चुनावी मैदान में उतरने के बाद जनता के सवालों का जवाब देने से भाजपा समर्थित प्रत्याशी और नेता- कार्यकर्ता बचते नजर आ रहे हैं.
वार्ड 17 सवालों के घेरे में निवर्तमान डिप्टी मेयर का चुनावी दावा
वार्ड 17 में डिप्टी मेयर रहते अमित सिंह से जनता का सीधा सवाल है कि “पिछले कार्यकाल में वार्ड को क्या मिला ?” पेयजल संकट के दौरान टैंकर व्यवस्था भी स्थायी नहीं बन सकी. अब चुनावी मैदान में उतरकर विकास के वादे दोहराए जा रहे हैं. मंगलवार से उनकी पत्नी सोनिया सिंह ने भी मोर्चा संभाल लिया है और जलापूर्ति योजना को धरातल पर लाने का वादा कर रही हैं. मगर जनता का उनसे सीधा सवाल है कि डिप्टी मेयर रहते उन्होंने भीषण जल संकट से जूझ रहे वार्ड 17 की जनता के लिए क्या किया. एक टैंकर पानी भी वार्ड में यदि भेजा होता तो जनता को भरोसा होता. अब जब सामाजिक संस्था जनकल्याण मोर्चा और जलाडो की पहल पर शहरी जलापूर्ति योजना कोर्ट की सख्ती से धरातल पर उतरने जा रही है तो प्रत्याशी इसका क्रेडिट लेने के लिए चुनावी शोर मचाकर जनता को फिर से बेवकूफ बना रहे हैं. जबकि निवर्तमान पार्षद नीतू शर्मा ने अपने बूते समूचे वार्ड में टैंकर से जलापूर्ति कराया. पद पर रहते हुए भी और कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी. जितने भी प्रत्याशी उक्त वार्ड से चुनावी मैदान में है कोई दवा करें या प्रमाण दे कि वे जनता की सेवा कर चुनावी मैदान में है. सभी आश्वासन और मेनिफेस्टो का सब्जबाग दिखाकर वोट मांग रहे हैं. हालांकि वार्ड की जनता इस बात को भली भांति समझ रही है.

