दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर देश की राजधानी में सियासी पारा चढ़ गया है. तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है.

टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि सरकार संसद नहीं चलने देना चाहती क्योंकि उसे कई कठिन सवालों के जवाब देने हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि SIR सरकार की सोची- समझी साजिश है. उन्होंने कहा, “करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. अगर संसद में यह मुद्दा नहीं उठेगा तो फिर कहां उठेगा ?” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव की लोकप्रियता से डरकर यह साजिश रची जा रही है.
वहीं, झामुमो कोटे से राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने सवाल उठाया कि यदि बिहार में फर्जी मतदाता हैं, तो फिर वही मतदाता वर्तमान सरकार और भाजपा के सांसदों को भी चुनते आए हैं. उन्होंने कहा, “कई बार गरीब लोगों के पास सभी दस्तावेज नहीं होते. उनके लिए अपनी पहचान साबित करना मुश्किल होता है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया के नाम पर गरीब और वंचित वर्ग को लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करना गलत है.
विपक्ष का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में SIR की प्रक्रिया की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है.

