दिल्ली. बहुचर्चित आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं. कोर्ट ने जिन धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं, उनमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120B (आपराधिक साजिश), तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और 13(1)(d) शामिल हैं.

इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू परिवार पर आरोप तय होना न्याय की जीत है. उन्होंने कहा कि यह मोदी सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है. साथ ही दावा किया कि बिहार की जनता ऐसे “फर्स्ट फैमिली” को दोबारा सत्ता नहीं सौंपेगी.
गौरतलब है कि यह मामला आईआरसीटीसी के दो होटलों के टेंडर आवंटन से जुड़ा है, जिसमें सीबीआई ने लालू परिवार पर कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आए इस फैसले का असर वोटिंग पैटर्न पर पड़ सकता है. झारखंड के हालिया उदाहरण का हवाला देते हुए कहा जा रहा है कि जैसे वहां हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झामुमो ने जनसमर्थन हासिल कर एनडीए को पूरी तरह हरा दिया, वैसे ही बिहार में भी लालू परिवार इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बना सकता है. आने वाले दिनों में इसका सीधा असर बिहार के चुनावी समीकरणों पर देखने को मिल सकता है.

