किशनगंज/ Arzoo Bakhsh जिले की पुलिस ने बड़े पैमाने पर फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है. यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पूरे बिहार में SIR (सर्वे ऑफ इंडिजिनस रेसिडेंट्स) की प्रक्रिया चल रही है और सीमांचल क्षेत्र पहले से ही सुर्खियों में है. इस खुलासे ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

पुलिस अधीक्षक सागर कुमार ने प्रेस वार्ता कर बताया कि जिले में कई लोगों को संदिग्ध तरीके से निवास प्रमाण पत्र जारी किए गए थे. गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की गई और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए. शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इस रैकेट में कुछ दलाल और स्थानीय स्तर के कर्मचारी शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने मोटी रकम लेकर फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए.
एसपी ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पुलिस की विशेष टीम पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और दोषियों की पहचान की जा रही है. उन्होंने साफ किया कि इसमें संलिप्त लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.
फिलहाल पुलिस ने इस मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है. दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यह पता चल सके कि फर्जी प्रमाण पत्र किन-किन को जारी किए गए और उनका इस्तेमाल कहां-कहां हुआ है. प्रशासन ने भी संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की है.
पुलिस सूत्रों की मानें तो इस रैकेट का नेटवर्क किशनगंज के अलावा सीमांचल के अन्य जिलों तक फैला हो सकता है. मामले के उजागर होने के बाद जिले के नागरिकों में भी चिंता का माहौल है क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर पहचान और नागरिकता से जुड़ा हुआ है.

