जमशेदपुर/ Afroz Mallik सूफी संत हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की पावन दरगाह अजमेर शरीफ में 814वें सालाना उर्स मुबारक का आग़ाज़ रिवायत, अकीदत और रूहानियत के माहौल में हो गया है. इस पाक मौके पर दिल्ली के महरौली स्थित हज़रत कुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह शरीफ से परंपरागत परंचम कुसाई 9 दिसंबर को रवाना किया गया था.

परंचम लेकर बाबा के चाहने वाले नंगे पांव हाथों में परंचम लिए भारत के विभिन्न हिस्सों से पैदल यात्रा करते हुए अजमेर शरीफ पहुंचे. सैकड़ों किलोमीटर की इस रूहानी यात्रा के दौरान अकीदतमंद “ख़्वाजा पिया की जय” और “ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह” के नारों के साथ आगे बढ़ते रहे.
अजमेर पहुंचने पर पूरे अदब और एहतराम के साथ परंचम दरगाह शरीफ में पेश किया गया, जिसके साथ ही 814वें उर्स मुबारक की औपचारिक शुरुआत हो गई. उर्स के आग़ाज़ के साथ ही दरगाह परिसर और आसपास के इलाकों में रूहानी माहौल बना हुआ है. देश- विदेश से लाखों जायरीन अजमेर शरीफ पहुंचकर चादरपोशी और फातिहा के ज़रिये अपनी अकीदत पेश कर रहे हैं. जायरीन अपने और अपने परिवार की सलामती, अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआएं मांग रहे हैं.
आपको बता दें कि अजमेर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह शरीफ में हर साल की तरह इस वर्ष भी उर्स मुबारक पूरी शान-ओ-शौकत और धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है. उर्स के दौरान महफ़िल-ए-समां, कव्वाली, लंगर और विशेष दुआओं का सिलसिला लगातार जारी है.
प्रशासन की ओर से सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि जायरीन को किसी प्रकार की परेशानी न हो. 814वें उर्स मुबारक के अवसर पर 27 दिसंबर को छट्टी शरीफ मनाई जाएगी. छट्टी शरीफ के मौके पर दरगाह शरीफ में विशेष रस्में अदा की जाएंगी, जिसमें देश-विदेश से आए सूफी संतों, उलेमा, खादिमों और बड़ी संख्या में अकीदतमंदों की शिरकत होने की उम्मीद है. इस दिन अजमेर शरीफ में अकीदत का सैलाब उमड़ने की संभावना जताई जा रही है.

