आदित्यपुर: नगर निगम के वार्ड संख्या 34 में इस बार मुकाबला बेहद रोचक होने के संकेत मिल रहे हैं. करीब 4600 मतदाताओं वाले इस वार्ड में चार बूथ हैं और चुनावी बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है.

लगातार दस वर्षों तक पार्षद रहे मनोज कुमार राय और उनकी पत्नी रीता देवी एक बार फिर वार्ड पर चुनावी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं. हालांकि इस बार एंटी इनकंबेंसी का असर भारी पड़ सकता है.
*वार्ड की सामाजिक बनावट*
यह वार्ड मुख्य रूप से ट्रांसपोर्ट कॉलोनी और बाबा कुटी क्षेत्र में बंटा हुआ है, जबकि बंतानगर का भी एक हिस्सा इसमें शामिल है. जातिगत समीकरण यहां हमेशा से परिणाम को प्रभावित करते रहे हैं. मतदाता संरचना पर नजर डालें तो भूमिहार वोटर सबसे अधिक हैं. उसके बाद ब्राह्मण, फिर ओबीसी और अन्य पिछड़ी जातियों का स्थान आता है. राजपूत समाज चौथे नंबर पर है जबकि अनुसूचित जनजाति के मतदाता भी निर्णायक भूमिका में रह सकते हैं.
*प्रत्याशियों का समीकरण*
महिला आरक्षित सीट होने के कारण इस बार तीन महिला प्रत्याशी मैदान में हैं. रीता देवी यादव समाज से आती हैं. उन्हें पूर्व में भूमिहार समाज का समर्थन मिलता रहा है और बाबा कुटी के सवर्ण समाज में भी उनकी पकड़ रही है. लेकिन पिछले कार्यकाल के बाद बाबा कुटी के मतदाताओं में नाराजगी की चर्चा है. उन पर “रबर स्टाम्प” होने का आरोप भी विपक्ष उछाल रहा है.
रिंकी देवी कहार समाज से आती हैं और ओबीसी समुदाय का झुकाव इस बार उनकी ओर माना जा रहा है. काम से ज्यादा नाम का ढिंढोरा पीटकर वोटरों पर प्रभाव डाल रही हैं. पति के आसरे चुनावी मैदान में हैं. शिक्षित होने का दावा करती हैं मगर शिक्षा से कोसों दूर हैं.
ज्योति कुमारी इकलौती प्रत्याशी हैं जो राजपूत समाज से आती हैं. यदि सवर्ण समुदाय इस बार एकजुट होता है तो वार्ड 34 को पहली बार सवर्ण पार्षद मिलने की संभावना बन सकती है. अब तक कभी रोस्टर प्रणाली तो कभी सवर्ण मतों का बिखराव इस संभावना के आड़े आता रहा है.
दिलचस्प तथ्य यह है कि रिंकी देवी और ज्योति कुमारी दोनों बाबा कुटी क्षेत्र से हैं, जबकि रीता देवी ट्रांसपोर्ट कॉलोनी से अकेली प्रत्याशी हैं. शिक्षा के स्तर पर ज्योति कुमारी को अन्य प्रत्याशियों की तुलना में आगे माना जा रहा है.
*क्या कहता है गणित*
कुल मिलाकर वार्ड 34 में जातीय समीकरण, क्षेत्रीय वफादारी और एंटी इनकंबेंसी तीनों फैक्टर निर्णायक होंगे. जो प्रत्याशी सामाजिक संतुलन साध लेगा और यदि सवर्ण वोट गोलबंद हो गए तो परिणाम चौंकाने वाला हो सकता है. नगर निगम चुनाव में यह वार्ड इस बार “हॉट सीट” के रूप में उभरता दिख रहा है.

