आदित्यपुर: सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर पुलिस की कार्यशैली की चर्चा सड़कों और गली- मुहल्लों में खूब हो रही है. साथ ही एसडीपीओ की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. इसके साथ ही कांग्रेसी नेताओं के हरकत की भी चर्चा हो रही है. यूं कह सकते खादी के दबाव में खाकी ने इंसानियत और क़ानून का मज़ाक बना दिया.

दरअसल बीते 18 जुलाई को थाना क्षेत्र के अन्नपूर्णा जनरल स्टोर के समीप एक मारपीट की घटना हुई थी जिसमें कांग्रेस जिलाध्यक्ष अंबुज कुमार और उनके भाई रवि कुमार पांडे घायल हुए थे. आरोप रोहित महतो और अफरीदी अंसारी उर्फ़ अफरीदी अख्तर पर लगा था. हालांकि उक्त घटना में रोहित महतो भी घायल हुआ है. घटना में अंबुज और रोहित दोनों के सर में चोट लगी थी. अगले दिन पुलिस ने अफरीदी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि मारपीट में मुख्य अभियुक्त रोहित था. रोहित ने भी काउंटर केस अंबुज पांडे, उनके भाई व अन्य पर मारपीट कर बंधक बनाकर थाना लाने और थाना परिसर में मारपीट करने का आरोप लगाया है. थाना परिसर में ऑन ड्यूटी पुलिस पदाधिकारियों ने उन्हें बचाया इसका भी जिक्र किया है. अंबुज पांडे ने अपने शिकायत में पिस्तौल के बल पर मारपीट करने का आरोप लगाया है. जो अपने आप में एक झूठ और भ्रामक आरोप है. यदि अंबुज के आरोप में सच्चाई है तो घटना में प्रयुक्त पिस्टल कहां गया यह जांच का विषय है ?
ऐसे में पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में क्यों खड़ा ना किया जाए जनता यह जानना चाहती है. बताया जाता है की घटना के वक्त थाना प्रभारी ड्यूटी पर मौजूद थे और ऑडी ऑफिसर के रूप में खलील अंसारी की मौजूदगी थी यह भी बताया जा रहा है कि अंबुज पांडे के चंगुल से थाना प्रभारी ने ही रोहित महतो और अफरीदी को छुड़ाया था. यदि अफरीदी जेल जा सकता है तो अंबुज पांडे का भाई क्यों जेल नहीं जा सकता यह बड़ा सवाल है ? लोग इसे सत्ता के मद में चूर कांग्रेसियों के दबाव में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई मान रहे हैं. जेल भेजे गए युवक की मां का कहना है, “दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी. दोनों ने केस किया. फिर भी सिर्फ मेरे बेटे को जेल भेज दिया गया. क्या कानून अब पैसों और पहचान के आधार पर काम करता है ? गरीबों को न्याय मिलना अब मुश्किल हो गया है.” आदित्यपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने थानेदार की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए हैं उससे ज्यादा सवालों के घेरे में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी आ गए हैं.

