आदित्यपुर: नगर निगम क्षेत्र में सफाई कर्मियों के नाम पर कहीं बड़ा फर्जीवाड़ा तो नहीं हो रहा है! इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि वार्डों में लगे गंदगी का अंबार फर्जीवाड़ा की ओर इशारा कर रहा है जिसकी जांच जरुरी है.

बताया जा रहा है कि ज़ब नगर निगम में चुने हुए जनप्रतिनिधि थे उस वक्त हर वार्ड में प्रतिदिन पांच से छः सफाईकर्मी अपनी सेवा देते थे जिसका मॉनिटरिंग तत्कालीन पार्षद करते थे. जनप्रतिनिधियों की गैर मौजूदगी में निगम के अधिकारी इनका मॉनिटरिंग कर रहे हैं. पूर्व पार्षदों ने बताया कि उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद कभी भी तीन से ज्यादा सफाईकर्मी उनके वार्ड में नहीं देखे गए न ही साफ- सफाई के लिए उनसे सलाह ली जाती है. सारा काम भगवान भरोसे चल रहा है. न कभी फॉगिंग होता है न ब्लीचिंग का छिड़काव किया जाता है. पूर्व में बरसात के दिनों में सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाती थी. हफ्ते में एक दिन रोस्टर के हिसाब से वृहत सफाई अभियान चलाया जाता था मगर अब ऐसा नहीं होता है. पूर्व पार्षदों ने बताया कि नगर निगम जाने पर उन्हें उचित सम्मान भी नहीं मिलता इसलिए अब नगर निगम कार्यालय जाना ही छोड़ दिया है. कई पार्षदों ने राज्य में निकाय चुनाव नहीं होने के पीछे इसका मुख्य कारण बताया.
क्या निकायों में लूट के उद्देश्य से नहीं कराया जा रहा राज्य में चुनाव !
ऐसे कयास लगने लगे हैं कि दो साल बाद भी राज्य में निकाय चुनाव इसलिए नहीं कराया जा रहा है ताकि अधिकारी जमकर भ्रष्टाचार करें और ऊपर तक लूट के पैसे का बंदरबांट करें. हाईकोर्ट की सख़्ती के बाद भी राज्य में निकाय चुनाव नहीं कराना न केवल कोर्ट का अवमानना है बल्कि राज्य की जनता को तीसरे मताधिकार के मौलिक अधिकारों से वंचित करना भी है. सरायकेला जिले के तीनों निकयों में हुए भ्रष्टाचार की जांच जरूरी है. केंद्र प्रायोजित कई योजनाएं अधर में अटके हैं इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा. अवैध रूप से नक्शा पास करने से लेकर सफाई कर्मियों के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार पर कैसे लगाम लगे यह चिंता का विषय है.

