आदित्यपुर: आठ साल बाद हो रहे झारखंड शहरी निकाय चुनाव में आदित्यपुर नगर निगम इस बार खास तौर पर चर्चा में है. रोस्टर प्रणाली के तहत मेयर सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होने के बाद कई दिग्गजों की रणनीति बदल गई है. मेयर की दौड़ से बाहर हुए कई चेहरे अब डिप्टी मेयर की कुर्सी पर नजरें गड़ाए हुए हैं. सियासी गलियारों में चर्चा है कि इस बार असली लड़ाई मेयर से ज्यादा डिप्टी मेयर पद को लेकर है. माना जा रहा है कि वार्ड 17, 18, 28, 29 और 30 इस बार डिप्टी मेयर की कुर्सी का भाग्य तय करेंगे. इन वार्डों के नतीजे पूरे निगम की सत्ता संतुलन की दिशा तय कर सकते हैं.

आदित्यपुर नगर निगम चुनाव में मेयर से ज्यादा डिप्टी मेयर सीट हथियाने को लेकर मारामारी, वार्ड 17, 18, 28, 29 या 30 तय करेगा डिप्टी मेयर के भाग्य का फैसला.
आदित्यपुर: 8 साल बाद हो रहे झारखंड शहरी निकाय चुनाव में आदित्यपुर नगर निगम का मुकाबला बेहद ही रोमांचक और दिलचस्प होने जा रहा है. रोस्टर प्रणाली के तहत मेयर सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होने के बाद मेयर का सपना संजोये कई जनप्रतिनिधियों को गहरा झटका लगा है. अब वैसे जनप्रतिनिधि डिप्टी मेयर सीट हथियाने की कवायद में जुटे हैं इसके लिए अपने-अपने हिसाब से बिसात बिछा चुके हैं. हालांकि इतना तय है कि अगला डिप्टी मेयर वार्ड 17, 18, 28, 29 या 30 तय करेगा.
वार्ड 17 में निवर्तमान डिप्टी मेयर अमित सिंह निवर्तमान पार्षद नीतू शर्मा के खिलाफ मैदान में हैं. उनके लिए यह सीट निकालना आसान नहीं होगा क्योंकि नीतू शर्मा अपने काम के दम पर न केवल सबसे भरोसेमंद जनप्रतिनिधि के रूप में जानी जाती हैं बल्कि जनता के बीच उनकी ईमानदार और कर्मठ व्यक्तित्व उन्हें मुकाबले में सबसे आगे नजर आ रही है. अमित सिंह उर्फ़ बॉबी सिंह ने डिप्टी मेयर रहते वार्ड की योजनाओं में पारदर्शिता नहीं रखा था. वार्ड के स्ट्रीट लाईट की योजना को उन्होंने अपने प्रभाव के दम पर दूसरे वार्ड में हस्तांतरित कराया था इसको लेकर नीतू शर्मा ने घोर विरोध किया था. उन्होंने अपने दम पर वार्ड की योजनाओं को धरातल पर उतारा. डिप्टी मेयर रहते अमित सिंह वार्ड की जनता को यह बता पाने में विफल साबित हो सकते हैं कि उन्होंने वार्ड 17 के विकास के लिए क्या योगदान दिया. जब वार्ड की जनता प्रचंड गर्मी में पानी के लिए त्राहिमाम कर रही थी तो उन्होंने अपने स्तर से क्या किया यह बता पाने में भी वह जनता को विफल साबित होंगे. हां वायदे और आश्वासन भले दे सकते हैं जो वार्ड की जनता को नागवार गुजर सकता है. क्योंकि जनता परिवर्तन नहीं हर कसौटी पर खरा उतर चुकी जनप्रतिनिधि पर ही भरोसा कर सकती है. वैसे अन्य प्रत्याशियों में वीरेंद्र सिंह यादव, अमित रंजन, रामचंद्र पासवान और अंबुज कुमार भी रेस में शामिल है मगर विगत 8 वर्षों से वार्ड की जनता से उनका सीधा सरोकार नहीं रहा जो उन्हें रेस में काफी पीछे कर सकता है. जातीय समीकरण और धनबल या बाहुबल इस वार्ड के मतदाताओं को प्रभावित करेगा ऐसा फिलहाल प्रतीत होता नजर नहीं आ रहा क्योंकि यह वर्ड रसूखदारों का वार्ड है और इस वार्ड के लोगों को सहज, सुलभ एवं हर वक्त मददगार जनप्रतिनिधि की आवश्यकता है. नीतू शर्मा के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जनता की समस्या यदि सामने आती है तो वह स्वयं जनता के पास पहुंच जाती है जनता उनके पास केवल धन्यवाद ज्ञापित करने पहुंचते हैं. 365 दिन उनके दरवाजे जनसेवा के लिए खुले रहते हैं. पिछला 15 साल का उनका राजनीतिक कैरियर पाक- साफ रहा है. पार्षद रहते भी उन पर किसी प्रकार का कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा. वार्ड के विकास के लिए अनेकों योजनाओं को उन्होंने धरातल पर उतारे हैं इसके कई प्रमाण वार्ड में मौजूद हैं.
अब बात करते हैं वार्ड 18 की. इस वार्ड से पहली बार किस्मत आजमा रहे अंकुर सिंह डिप्टी मेयर की रेस में शामिल हो सकते हैं अंकुर सिंह इचागढ़ के पूर्व बाहुबली विधायक अरविंद सिंह के भतीजे और दिवंगत प्रवीण सिंह के पुत्र हैं प्रवीण सिंह अपने भाई के चुनावी रणनीतिकार थे. अंकुर सिंह धनबल और बाहुबल के मामले में किसी भी प्रत्याशी से सबसे आगे होंगे. उनका मुकाबला वर्तमान पार्षद रंजन सिंह के साथ होगा. रंजन सिंह काम के दम पर जनता के बीच जा सकते हैं मगर जनता का मिजाज इसबार बदल सकता है. रंजन धनबल और बाहुबल के आगे कितना टिक सकेंगे यह देखना दिलचस्प होगा. यदि अंकुर सिंह की हार होती है तो पूर्व विधायक अरविंद सिंह की यह नैतिक हार होगी मगर यदि जीत जाते हैं तो अगला डिप्टी मेयर वार्ड 18 देगा यह तय माना जा रहा है.
अब बात करते हैं वार्ड 28 की इस वार्ड से निवर्तमान पार्षद अमृता श्रीवास्तव चुनावी मैदान में हैं. उनकी जीत लगभग सुनिश्चित है. यह वार्ड निवर्तमान मेयर विनोद कुमार श्रीवास्तव का पारंपरिक वार्ड है. इस वार्ड से मेयर परिवार ही चुनाव जीतते रहे हैं. यहां इस परिवार को चुनौती देने वाले की अबतक जमानत जप्त होती रही है. हालांकि इस बार बीजेपी के कोर वोटरों और कैडरों में निवर्तमान मेयर के पुत्र अभिषेक विशाल को आरआईटी मंडल अध्यक्ष बनाये जाने को लेकर नाराजगी नजर आ रही है. ऊपर से वार्ड 29 से अपनी पत्नी और आदित्यपुर नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष रही रीता श्रीवास्तव, वार्ड 30 से भाजपा नेता सतीश शर्मा, वार्ड 31 से निवर्तमान पार्षद रिंकू राय, वार्ड 20 से प्रभावती देवी, वार्ड 34 से निवर्तमान पार्षद रीता देवी, वार्ड 35 से निवर्तमान पार्षद प्रभासिनी कालुंडिया को समर्थन कर डिप्टी मेयर सीट हथियाने की जुगत में हैं. मेयर का यह निर्णय बीजेपी के कई कैडरों को नागवार गुजर रहा है.
उधर वार्ड 30 में मुकाबला रोचक होने के आसार नजर आ रहे हैं. इस सीट से एक ओर जहां लगातार चौथी बार सुधीर चौधरी का परिवार चुनावी मैदान में है वहीं मेयर पद के प्रबल दावेदार पुरेन्द्र नारायण सिंह की मौजूदगी और भाजपा नेता सतीश शर्मा, अभय झा सरीखे नेता मुकाबला को रोचक बनाएंगे. पुरेन्द्र विशुद्ध रूप से नेता हैं और सालों भर राजनीति में सक्रिय रहते हैं. आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं. जनता से जुड़े मुद्दों पर हमेशा मुखर रहे हैं. टाटा स्टील में इंजीनियर रहते वीआरएस लेकर सक्रिय रूप से राजनीति से जुड़े हैं. हर वर्ग के लोगों के बीच उनकी सीधी पकड़ है. उनकी नजर भी डिप्टी मेयर सीट पर है. उन्होंने अपने पारंपरिक वार्ड वार्ड 32 से अपने छोटे भाई की पत्नी yस्मिता कुमारी को चुनावी मैदान में उतारा है. अन्य वार्ड में भी अपने समर्थित प्रत्याशियों को उतारकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है.
कुल मिलाकर कहे तो आदित्यपुर नगर निगम के चुनावी बिसात पर मेयर से ज्यादा डिप्टी मेयर सीट हथियाने पर केंद्रित है. वैसे मेयर सीट पर भी घमासान कम नजर नहीं आ रहा है. वहां भी बागियों और भीतराघात का दंश पार्टी समर्थित प्रत्याशियों को झेलना पड़ सकता है. इसका विश्लेषण हम अगले अंक में करेंगे.

