आदित्यपुर: / Parmeshwar Gorai झारखंड में निकाय चुनाव नहीं होने से गरीबों के साथ- साथ आम लोगों को क्या परेशानी हो रही है इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं. सरकार को रेवेन्यू चाहिए अधिकारी लूट कर लाएं या लुटवाकर उससे सरकार को कोई सरोकार नहीं.

आज एक तस्वीर हमारे हाथ लगी है जिसे देखकर आप भी सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि आखिर झारखंड में क्या हो रहा है. गरीबों का निवाला कोई और नहीं बल्कि सरकारी तंत्र निगल रहा है. दरअसल यह तस्वीर कंबल की है. इसमें कोई नई बात नहीं है, मगर कंबल सरकारी है इसलिए यह बड़ी बात है.

नगर निगम कार्यालय के कबाड़ में फेंके गए गरीबों के कंबल
सरायकेला- खरसावां जिला के आदित्यपुर नगर निगम कार्यालय के पहले मंजिल पर कबाड़ में फेंका गया कंबल अपनी बदहाली की आंसू बहा रहा है. इसमें बताने की जरूरत नहीं कि इन कंबलों के साथ क्या हो रहा है. इसे कहां रहना चाहिए और कहां है. सरकार की ओर से ठंड में ठिठुरते गरीबों के लिए नगर निगम को कंबल दिया गया था. क्षेत्र की आबादी के लिहाज से कंबल कम पड़ गए तो निगम के बाबुओं ने कंबल को बोरे में बांधकर कबाड़ में रखवा दिया. यदि इन कंबलों को अच्छे से रख जाता तो शायद इस साल गरीबों को मिल जाता. क्या बचे हुए कंबलों का रिकॉर्ड रजिस्टर में मेंटेन है इस सवाल का जवाब पूछने हमारी टीम नगर निगम पहुंची, मगर ना तो प्रशासक मिले ना ही अन्य किसी पदाधिकारी ने इस पर कुछ भी बोलना जरूरी समझा.

कंबल के रखरखाव पर उठे सवाल
सवाल कंबल का नहीं सवाल सिस्टम और सरकारी तंत्र का है. यदि समय रहते हेमंत सोरेन सरकार अपने मशीनरी पर लगाम नहीं लगाती है तो सत्ता में वापसी आसान नहीं होगी. खासकर निकायों में हो रहे भ्रष्टाचार से जनता के साथ- साथ जनप्रतिनिधि भी त्रस्त हो चुके हैं. उसमें आदित्यपुर नगर निगम पहले पायदान पर खड़ा है.

